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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए भीषण आतंकी हमले के बाद देशभर में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। इस हमले में 25 पर्यटकों सहित 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी, जिससे पूरे देश में गुस्से की लहर फैल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हमले की निंदा करते हुए कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि इस कायराना हरकत को अंजाम देने वालों को ऐसी सज़ा मिलेगी जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।
इस हमले के बाद केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न राज्यों को सतर्क रहने और नागरिक सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 7 मई, बुधवार को देशभर में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित करने को कहा है। इस ड्रिल में हवाई हमलों की स्थिति से निपटने के लिए विशेष अभ्यास किया जाएगा।
ड्रिल के दौरान ये तैयारियां होंगी:
- हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए जाएंगे ताकि लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण ले सकें।
- क्रैश ब्लैकआउट अभ्यास किया जाएगा, जिसमें सभी लाइटें बंद रखी जाएंगी और किसी भी प्रकार की रोशनी बाहर न आने देने के निर्देश होंगे।
- महत्वपूर्ण संयंत्रों व प्रतिष्ठानों को छिपाने के उपाय किए जाएंगे ताकि वे दुश्मन के निशाने पर न आएं।
- निकासी योजना का पूर्वाभ्यास होगा और इसे अद्यतन किया जाएगा।
- नागरिकों व छात्रों को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे हमले की स्थिति में सही प्रतिक्रिया दे सकें।
इससे पहले, पंजाब के फिरोजपुर में सेना की छावनी में रविवार को आधे घंटे का पूर्ण ब्लैकआउट रिहर्सल किया गया था। रात 9 बजे से 9:30 बजे तक सभी लाइटें बंद रखी गईं और नागरिकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किसी भी स्रोत से रोशनी बाहर न आए। इससे पहले लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को इस अभ्यास की जानकारी दी गई थी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह तैयारी न केवल पहलगाम हमले के बाद बने हालात के कारण है, बल्कि यह नागरिक सुरक्षा उपायों को और अधिक प्रभावी बनाने का भी प्रयास है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी ऐसे उपाय देखे गए हैं, जहां मोबाइल ऐप्स से लेकर सायरन तक का उपयोग नागरिकों को अलर्ट करने के लिए किया जा रहा है।
भारत इस कठिन समय में एक ओर अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर हमले के जिम्मेदार आतंकियों को सबक सिखाने की दिशा में भी निर्णायक कदम उठाने की तैयारी में है।