Jharkhand News: रामगढ़ स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों से जुड़े अवमानना मामले में सोमवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान रामगढ़ के उपायुक्त वर्चुअल माध्यम से अदालत में पेश हुए और मंदिर क्षेत्र से हटाए गए दुकानदारों के पुनर्वास को लेकर जानकारी दी.
डीसी रामगढ़ ने अदालत को बताया कि मंदिर परिसर से हटाए गए 254 वेंडरों को पहले अस्थायी तौर पर मंदिर के समीप बसाया जाएगा. इसके बाद उनके लिए दुकानें बनाकर स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी.
अदालत को यह भी बताया गया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में दरी बिछाने, पेयजल उपलब्ध कराने और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की योजना है. साथ ही वन भूमि पर अतिक्रमण कर दुकान चलाने वालों को हटाया जाएगा. प्रशासन ने कहा कि खाली कराई गई जमीन का उपयोग मंदिर के पुनर्निर्माण और विकास कार्यों में किया जाएगा.
सुनवाई के दौरान डीसी रामगढ़ ने रजरप्पा मंदिर पुनर्विकास से जुड़े मास्टर प्लान को पेश करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की. न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को तय करते हुए डीसी को फिर से उपस्थित रहने का निर्देश दिया.
हाई कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि भैरवी नदी के डेंजर जोन में लोगों की सुरक्षा के लिए दो स्तर पर बैरिकेडिंग की जानी चाहिए. अदालत ने निर्देश दिया कि लो-लेवल बैरिकेडिंग तत्काल कराई जाए, जबकि हाई-लेवल बैरिकेडिंग बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाए.
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता भारत कुमार ने पक्ष रखा. पिछली सुनवाई में जल संसाधन विभाग के सचिव ने कोर्ट को बताया था कि भैरवी नदी के डेंजर जोन में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 50 लाख रुपये की लागत से डीपीआर तैयार की गई है.
हाई कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में कहा था कि वर्ष 2023 में जनहित याचिका पर मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर कई निर्देश जारी किए गए थे. अदालत ने यह भी कहा था कि भैरवी नदी तट पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं, इसलिए कोर्ट के आदेशों का पालन जरूरी है.
अवमानना याचिका में 11 अगस्त 2023 को हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन की मांग की गई है. उस आदेश में राज्य सरकार, पर्यटन विभाग, झारखंड पर्यटन विकास निगम और रामगढ़ जिला प्रशासन को मंदिर परिसर के विकास, स्थायी स्नान घाट, कपड़े बदलने के कक्ष, शौचालय, पेयजल, रोशनी, चिकित्सा सुविधा, अतिक्रमण हटाने और नदी चौड़ीकरण समेत कई व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे.