Ranchi: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) के जेकब हॉल में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान "आदिवासी छात्र संघ" (ACS) ने रांची विश्वविद्यालय की वर्तमान नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने कुलपति की नियुक्ति, क्लस्टर सिस्टम और पदों के पुनर्गठन को लेकर राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि इन नई नीतियों से झारखंड के आदिवासी, दलित और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के शैक्षणिक भविष्य और अधिकारों पर सीधा प्रहार हो रहा है।
कुलपति की नियुक्ति पर विवाद, पुराने आरोपों का दिया हवाला
संघ ने रांची विश्वविद्यालय की नवनियुक्त कुलपति प्रोफेसर सरोज शर्मा की नियुक्ति पर कड़ा ऐतराज जताया है। छात्र नेताओं ने दिल्ली में दर्ज एक एफआईआर (863/2024) का हवाला देते हुए दावा किया कि एनआईओएस (NIOS) की चेयरपर्सन रहते हुए उन पर एक दलित कर्मचारी को आत्महत्या के लिए उकसाने और जातीय अपमान के गंभीर आरोप लगे थे। संघ के कार्यकारी अध्यक्ष दया राम ने कहा कि झारखंड जैसे संवेदनशील राज्य के शीर्ष पद पर ऐसे विवादित चेहरे की नियुक्ति एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की भावनाओं के विपरीत है। उन्होंने मांग की कि इस पद पर स्थानीय और स्वच्छ छवि वाले शिक्षाविदों को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
क्लस्टर सिस्टम और आरक्षण नीतियों पर कड़ा विरोध
क्लस्टर सिस्टम (संकल्प संख्या 902) को लेकर संघ ने कहा कि कॉलेजों में विषयों का यह विभाजन ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए मुसीबत बन जाएगा। छात्रों को अलग-अलग विषयों की पढ़ाई के लिए कई कॉलेजों की दौड़ लगानी पड़ेगी, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होंगे। इसके अलावा, संघ ने पदों के युक्तिकरण (Rationalization) और सरेंडर की प्रक्रिया पर भी उंगली उठाई है। नेताओं का आरोप है कि आरक्षण नियमों की अनदेखी कर पदों को खत्म किया जा रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) द्वारा दिए गए अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।
राज्यपाल से नियुक्ति रद्द करने की अपील
आदिवासी छात्र संघ ने राज्यपाल सह कुलाधिपति से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उनकी प्रमुख मांगों में प्रोफेसर सरोज शर्मा की नियुक्ति को रद्द करना, क्लस्टर सिस्टम को समाप्त करना और पद पुनर्गठन की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाना शामिल है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आरक्षण रोस्टर के अनुसार पारदर्शी नियुक्तियां सुनिश्चित नहीं की गईं, तो वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन को और तेज करेंगे। प्रेस वार्ता में अमृत मुंडा, दया राम, अखिलेश पाहन और अन्य प्रमुख पदाधिकारी मौजूद थे।