Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट में हिरासत में मौत और कथित प्रताड़ना से जुड़ी शाईदा खातून की अवमानना याचिका पर अहम सुनवाई हुई. इस दौरान MMCH मेदिनीनगर के सुपरीटेंडेंट ऑफ मेडिसिन, डिप्टी सुपरीटेंडेंट और ड्यूटी डॉक्टर ओरिजिनल ड्यूटी रजिस्टर के साथ अदालत में पेश हुए. डॉक्टरों ने कोर्ट के सामने वे सभी संबंधित दस्तावेज और रजिस्टर पेश किए, जिनके आधार पर युवक की स्थिति की रिपोर्ट तैयार की गई थी.
दस्तावेजों में हेरफेर का गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान प्रार्थी पक्ष ने दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए. कोर्ट को बताया गया कि MMCH मेदिनीनगर के डॉक्टरों ने जो फोटोकॉपी सीजेएम (CGM) कोर्ट में जमा की थी, उसमें मृतक की चोटों से संबंधित जानकारी कथित तौर पर बाद में जोड़ी गई थी. प्रार्थी के अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि "दस्तावेजों में हेरफेर कर युवक की वास्तविक स्थिति को छिपाने की कोशिश की गई." हाईकोर्ट ने इन विसंगतियों पर डॉक्टरों से जवाब तलब किया है.
हिरासत में मारपीट और पुलिस की भूमिका
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, 1 मार्च 2025 को पुलिस ने महफूज अहमद को नवाबाजार से हिरासत में लिया था. परिजनों का आरोप है कि "हिरासत के दौरान उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई." बाद में उसे पांकी थाना कांड संख्या 25/2025 के तहत कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया था. चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस ने अस्पताल का जो प्रमाण पत्र पेश किया था, उसमें गंभीर चोटों के बावजूद युवक को "फिट फॉर कस्टडी" यानी हिरासत के लिए फिट बताया गया था.
महाधिवक्ता और प्रार्थी पक्ष की दलीलें
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने सरकार का पक्ष रखा, जबकि प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शादाब इकबाल और आयुष राज ने पैरवी की. कोर्ट ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने और रिकॉर्ड्स की जांच करने के बाद इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब अदालत के अंतिम आदेश से यह साफ होगा कि इस मामले में लापरवाही या साजिश के लिए कौन जिम्मेदार है.