Jharkhand News: झारखंड के विकास के लिए राज्यसभा सांसदों को मिले क्षेत्र विकास फंड के खर्च और काम की रफ्तार में बड़ा अंतर सामने आया है. कहीं राशि खर्च तो हुई है लेकिन काम पूरे नहीं हुए, तो कहीं सीमित खर्च के बावजूद परियोजनाएं जमीन पर दिखने लगी हैं. आंकड़े बताते हैं कि फंड आवंटन और उसके इस्तेमाल के बीच तालमेल की कमी अब सवाल खड़े कर रही है.
आंकड़ों के अनुसार झारखंड के पांच राज्यसभा सांसदों को अब तक क्षेत्र विकास मद में कुल 84.4 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. इसमें से 56.19 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. खर्च के मामले में सांसद दीपक प्रकाश सबसे आगे हैं. उन्हें 22.76 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया था, जिसमें से 16.47 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं.
काम कराने में आदित्य साहू अव्वल
वहीं काम पूरा कराने के प्रतिशत के लिहाज से सांसद आदित्य साहू अव्वल हैं. उन्होंने 10 करोड़ 26 लाख 88 हजार रुपये के विकास कार्य पूरे कराए हैं, जो उनके कुल खर्च का 59.6 फीसदी है.
1. महुआ मांझी को 17.86 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया था. इसमें से 14.28 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. उन्होंने कुल 318 कार्यों की अनुशंसा की, जिनमें से 149 पूरे हुए हैं. लगभग 7 करोड़ 95 लाख रुपये के कार्य अभी प्रगति पर हैं, जबकि 42.73 लाख रुपये के कार्य अस्वीकृत किए गए हैं. करीब 8 करोड़ 6 लाख रुपये के कार्य पूरे किए जा चुके हैं.
2. आदित्य साहू को भी 17.86 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे. उन्होंने 15.03 करोड़ रुपये खर्च किए. 214 कार्यों की अनुशंसा में से 130 पूरे किए गए हैं. 5 करोड़ 81 लाख रुपये के कार्य चल रहे हैं, जबकि 1.15 करोड़ रुपये के कार्य अस्वीकृत हुए हैं.
3. दीपक प्रकाश के खाते में 22.76 करोड़ रुपये आए. उन्होंने 298 कार्यों की अनुशंसा की, जिनमें से 121 पूरे हुए हैं. 11.47 करोड़ रुपये के कार्य अभी चल रहे हैं, जबकि 1.93 करोड़ रुपये के कार्य अस्वीकृत हुए हैं. अब तक 7.10 करोड़ रुपये के कार्य पूरे हुए हैं.
4. डॉ प्रदीप वर्मा को 12.96 करोड़ रुपये आवंटित किए गए. उन्होंने 7.24 करोड़ रुपये खर्च किए. 120 कार्यों की अनुशंसा के बावजूद अब तक एक भी कार्य पूरा नहीं हो सका है. अधिकतर कार्य प्रगति पर हैं, जबकि 2.92 करोड़ रुपये के कार्य अस्वीकृत हुए हैं.
5. डॉ सरफराज अहमद को भी 12.96 करोड़ रुपये का फंड मिला. उन्होंने अब तक 3.17 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. 169 कार्यों की अनुशंसा में से केवल तीन पूरे हो सके हैं. 2.65 करोड़ रुपये के कार्य चल रहे हैं, जबकि 64.50 लाख रुपये के कार्य अस्वीकृत किए गए हैं.
क्षेत्र विकास फंड के उपयोग में सांसदों के बीच भारी असमानता
आंकड़े साफ दिखाते हैं कि क्षेत्र विकास फंड के उपयोग में सांसदों के बीच भारी असमानता है. कहीं खर्च ज्यादा है लेकिन काम पूरे नहीं हो रहे, तो कहीं सीमित संसाधनों में बेहतर परिणाम सामने आए हैं. यह स्थिति केवल फंड आवंटन का नहीं बल्कि निगरानी, प्राथमिकता और कार्यान्वयन की भी है. यदि समय रहते खर्च और कार्य पूर्णता के बीच संतुलन नहीं बनाया गया, तो विकास फंड का असली उद्देश्य अधूरा ही रह जाएगा.