Jharkhand High Court: झारखंड के पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने से जुड़े आदेश के अनुपालन में देरी पर झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को अवमानना नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है कि कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
चार सप्ताह में सभी थानों में CCTV लगाने का निर्देश
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई की। अदालत ने राज्य सरकार को सभी पुलिस थानों में चार सप्ताह के भीतर CCTV कैमरे लगाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने DGP को इस संबंध में शपथ पत्र दाखिल कर आदेश के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव और गृह सचिव को भी मामले को गंभीरता से लेने को कहा है। साथ ही DGP को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि अदालत के आदेश का पालन तय समयसीमा के भीतर किया जाए।
तरुण महतो की हिरासत में कथित पिटाई से जुड़ा है मामला
मामला झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के पूर्व इचागढ़ प्रत्याशी तरुण महतो से जुड़ा है। उनकी पत्नी ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर पुलिस हिरासत में कथित तौर पर मारपीट और प्रताड़ना की शिकायत की थी। इसके बाद अदालत ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की।
आरोप है कि 19 नवंबर 2025 की रात इचागढ़ पुलिस तरुण महतो को थाने ले गई थी, जहां उनके साथ मारपीट और कथित रूप से थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया।
मेडिकल ऑफिसर पर कार्रवाई की जानकारी भी नहीं दे सकी सरकार
पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने सरायकेला के एसपी से जिले के पुलिस थानों में CCTV लगाने के लिए की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से उस मेडिकल ऑफिसर के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी गई थी, जिसने तरुण महतो को अदालत में पेश किए जाने के दौरान "फिट फॉर कस्टडी" का प्रमाण दिया था।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से मेडिकल ऑफिसर के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इस पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई। अब राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर थानों में CCTV लगाने की दिशा में की गई कार्रवाई की जानकारी देनी होगी, जबकि मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।