Jharkhand News: झारखंड में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने की दिशा में राज्य सरकार एक और कदम उठाने जा रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 29 जून को 1,042 नवनियुक्त सहायक आचार्यों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे. यह कार्यक्रम खेलगांव में आयोजित होगा. सरकार की ओर से प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में 26 हजार सहायक आचार्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से जारी है. अधिकारियों के अनुसार अब तक 12,500 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति पूरी हो चुकी है.
पहली से आठवीं तक के लिए होगी नियुक्ति
इस चरण में पहली से पांचवीं कक्षा के लिए 274 और छठी से आठवीं कक्षा के लिए 768 सहायक आचार्यों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे. सरकार का मानना है कि इससे लंबे समय से शिक्षक विहीन या कम शिक्षकों वाले स्कूलों को राहत मिलेगी, हालांकि अभी भी हजारों पद रिक्त हैं.
स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था होगी मजबूत
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई सरकारी स्कूलों में एक ही शिक्षक के भरोसे पढ़ाई संचालित हो रही थी. नई नियुक्तियों के बाद ऐसे विद्यालयों में नियमित शिक्षण व्यवस्था बहाल करने में मदद मिलेगी. नियुक्ति समारोह में विभिन्न जिलों से चयनित अभ्यर्थी शामिल होंगे. जिला स्थापना समितियों की अनुशंसाएं प्राथमिक शिक्षा निदेशालय को भेजी जा चुकी हैं और कार्यक्रम की तैयारियां अंतिम चरण में हैं.
पलामू में सबसे अधिक, रामगढ़ में सबसे कम नियुक्ति
जिलावार सूची के अनुसार, पलामू में सबसे अधिक 123 सहायक आचार्यों की नियुक्ति होगी, जबकि रामगढ़ में सबसे कम 4 नियुक्तियां होंगी. इसके अलावा साहिबगंज में 63, पश्चिमी सिंहभूम में 61, देवघर में 59, दुमका में 54, गोड्डा में 53, पाकुड़ में 51, धनबाद में 42, लातेहार में 41, रांची और जामताड़ा में 39-39, पूर्वी सिंहभूम में 39, रांची में 36, गढ़वा और सरायकेला-खरसावां में 34-34, गुमला में 27, बोकारो में 24, सिमडेगा में 21, हजारीबाग में 15, खूंटी में 12, लोहरदगा में 11, गिरिडीह में 2 और कोडरमा में 1 शिक्षक की नियुक्ति होगी.
विषयवार भी होगी शिक्षकों की तैनाती
सरकार भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों के लिए भी शिक्षकों की नियुक्ति कर रही है. इस चरण में भाषा विषय के 150, गणित एवं विज्ञान के 251 तथा सामाजिक विज्ञान के 387 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे. विभाग का कहना है कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी, ताकि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सके.