Ranchi News : स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के विकास को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं सामने रखीं। अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं, किसानों, महिलाओं, रोजगार, उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 25 वर्षों में झारखंड को ऐसा राज्य बनाने का लक्ष्य है, जहां आर्थिक विकास के साथ जल, जंगल, जमीन और स्थानीय पहचान भी सुरक्षित रहे।
मुख्यमंत्री ने सबसे पहले देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले वीरों को याद किया। उन्होंने बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू और फूलो-झानो सहित झारखंड के स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि उनके संघर्ष और विचार राज्य के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हैं।
युवाओं के लिए भर्ती में पारदर्शिता और रोजगार पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य और उनकी उम्मीदों को लेकर गंभीर है। भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने की बात कही गई। इसके तहत समय पर वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने, सुरक्षित तकनीक के इस्तेमाल और समय पर आंसर की जारी करने की व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने "छात्रों की बात, छात्रों के साथ" अभियान का भी जिक्र किया। इसके जरिए छात्रों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और अभिभावकों से सुझाव लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि JPSC, SSC और दूसरी भर्ती एजेंसियों के जरिए जल्द बडे स्तर पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसके अलावा MSME, कृषि, पर्यटन, डिजिटल सेवा और स्टार्टअप के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएंगे।
किसानों को कृषि उद्यमी बनाने की तैयारी
किसानों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उन्हें केवल खेती तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि कृषि उद्यमी बनाने की दिशा में काम कर रही है। खेती के साथ डेयरी, मछली पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन और लघु वनोपज जैसे कामों को बढावा दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत करीब 2.15 लाख एकड जमीन पर पौधे लगाए गए हैं और इससे करीब 3 लाख परिवारों को आजीविका से जोडने का दावा किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में पैदा होने वाले आम का विदेशों में भी निर्यात किया जा रहा है।
महिलाओं के लिए मंईयां सम्मान योजना पर जोर
महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री ने मंईयां सम्मान योजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के साथ उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना के लिए 15 हजार करोड रुपये का प्रावधान किए जाने की बात उन्होंने कही।
ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोडने के लिए सखी मंडलों का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य में 3.25 लाख से अधिक सखी मंडल हैं, जिनसे करीब 35 लाख परिवार जुडे हैं। उन्होंने कहा कि इन समूहों के उत्पादों के लिए बनाया गया "पलाश ब्रांड" बाजार में अपनी पहचान बना रहा है।
गुमला के रागी मिशन का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 में सिर्फ 10 महिलाओं से शुरू हुआ यह अभियान अब 35 हजार से अधिक किसानों और 500 से ज्यादा महिलाओं की आजीविका से जुड चुका है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की योजना
स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सभी पंचायतों में दवा दुकान खोलने और हर पंचायत को डेडिकेटेड एंबुलेंस सेवा देने की दिशा में काम कर रही है। इन एंबुलेंस सेवाओं के संचालन में स्थानीय ग्राम और पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका होगी।
उन्होंने बताया कि पूर्वी सिंहभूम, गिरिडीह, देवघर, जामताडा और धनबाद में 6 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा एक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल भी बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने की बात भी कही गई। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। सरकार का जोर इलाज के साथ बीमारी से बचाव, पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर भी है।
1 लाख करोड के निवेश प्रस्तावों का दावा
औद्योगिक विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में 16 लाख से ज्यादा MSME हैं, जिनसे 60 लाख से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली में हुए नेशनल स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन के दौरान करीब 1 लाख करोड रुपये के निवेश प्रस्तावों पर MoU किए गए हैं। इससे 22 हजार से अधिक युवाओं को सीधे रोजगार मिलने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का विकास केवल बडे भवनों और शहरों के विस्तार से नहीं मापा जाना चाहिए। वास्तविक विकास तब होगा, जब आम लोगों को रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और सम्मान के साथ आगे बढने के अवसर मिलेंगे।
उन्होंने अगले 25 वर्षों के लिए ऐसे झारखंड का लक्ष्य रखा, जो आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ संवेदनशील और न्यायपूर्ण भी हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के साथ जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और स्थानीय पहचान की रक्षा भी जरूरी है।