Jharkahnd News : झारखंड में बड़ी संख्या में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को लंबे समय से “वेटिंग फॉर पोस्टिंग” में रखे जाने का मामला अब राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। भाजपा जमशेदपुर महानगर के पूर्व जिला प्रवक्ता अंकित आनंद ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप, उच्चस्तरीय समीक्षा और जवाबदेही तय करने की मांग की है।
60 JAS, 12 IAS और करीब 100 DSP अब भी पदस्थापन की प्रतीक्षा में
ईमेल के जरिए भेजे गए पत्र में अंकित आनंद ने कहा है कि राज्य में करीब 72 प्रशासनिक अधिकारी, जिनमें 60 झारखंड प्रशासनिक सेवा (JAS) और 12 IAS अधिकारी शामिल हैं, लंबे समय से पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग 100 पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी भी अब तक प्रतिनियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न जिलों और विभागों में कई महत्वपूर्ण पद खाली होने के बावजूद बड़ी संख्या में अधिकारियों को बिना दायित्व के रखा गया है, जिससे प्रशासनिक कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
बिना काम के वेतन भुगतान को बताया वित्तीय कुप्रबंधन
भाजपा नेता अंकित आनंद ने इस स्थिति को गंभीर प्रशासनिक शिथिलता और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का मामला बताया है। उन्होंने कहा कि बिना कार्य लिए अधिकारियों को वेतन भुगतान किया जाना टैक्सदाताओं के पैसे का अनुचित उपयोग है।
पत्र में दावा किया गया है कि ऐसे अधिकारियों पर प्रतिवर्ष 25 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हो रही है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की वित्तीय और प्रशासनिक समीक्षा कराने की मांग की है।
वित्त विभाग के संकल्प का भी किया उल्लेख
अंकित आनंद ने अपने पत्र में झारखंड वित्त विभाग के संकल्प संख्या-1337/वि, दिनांक 20 मई 2022 का उल्लेख करते हुए कहा कि नियमों के अनुसार किसी भी अधिकारी को एक माह से अधिक समय तक “वेटिंग फॉर पोस्टिंग” में नहीं रखा जा सकता।
उन्होंने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से रिक्त पदों पर शीघ्र पदस्थापन करने, पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।