Bihar: बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति केवल परंपरा और स्वाद का पर्व नहीं रही है, बल्कि यह वर्षों से सियासी संदेशों और समीकरणों को साधने का एक अहम मंच भी रही है। इस बार यह त्योहार इसलिए खास हो गया है क्योंकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और लालू परिवार से लंबे समय से दूर चल रहे तेज प्रताप यादव अचानक राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर पहुंचे। करीब आठ महीने बाद उनकी इस पारिवारिक वापसी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
तेज प्रताप यादव ने मामा-पिता समेत भाई को किया आमंत्रित
तेज प्रताप यादव ने 14 जनवरी को अपने स्टैंड रोड स्थित आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया है, जिसके लिए उन्होंने पूरे परिवार को आमंत्रित किया है। इस मुलाकात की जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए साझा की। तेज प्रताप ने बताया कि उन्होंने पिता लालू प्रसाद यादव और मां राबड़ी देवी से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से उनकी भेंट सबसे ज्यादा चर्चा में रही। इसके अलावा उन्होंने अपनी भतीजी कात्यायनी से भी मुलाकात की और इन पलों को उन्होंने बेहद खास और भावुक बताया।
हालांकि, इस पारिवारिक मुलाकात के पीछे रिश्तों में आई कड़वाहट का एक लंबा इतिहास रहा है। बीते साल मई में अनुष्का यादव से जुड़े एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के बाद लालू परिवार को काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी। इसी प्रकरण के बाद लालू प्रसाद यादव ने सख्त कदम उठाते हुए तेज प्रताप यादव को संस्कारहीन बताते हुए न केवल परिवार बल्कि पार्टी से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
दोनों भाइयों के बीच सहजता अब भी नजर नहीं आती
इसके बाद तेज प्रताप पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए थे। उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाकर विधानसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिल सकी। इस दौरान परिवार से दूरी और भाई तेजस्वी यादव के साथ रिश्तों में तल्खी लगातार चर्चा में बनी रही। चाहे चुनावी दौर में एयरपोर्ट पर आमना-सामना हो या अदालत में पेशी, तेजस्वी यादव ने हमेशा तेज प्रताप से दूरी बनाए रखी। हालिया तस्वीरों को लेकर भी सोशल मीडिया पर यह चर्चा जोरों पर है कि दोनों भाइयों के बीच सहजता अब भी नजर नहीं आती।
इस दही-चूड़ा भोज को राजनीतिक तौर पर और भी अहम बना देता है तेज प्रताप का वह कदम, जिसमें उन्होंने अपने परिवार के अलावा एनडीए के बड़े नेताओं को भी न्योता भेजा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को आमंत्रण देकर तेज प्रताप ने सियासी संकेतों की नई लकीर खींच दी है। इसे उनकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश के साथ-साथ परिवार से सुलह का प्रयास भी माना जा रहा है।
फिलहाल सबकी नजरें 14 जनवरी पर टिकी
कभी दही-चूड़ा भोज लालू प्रसाद यादव के आवास से बिहार की राजनीति की दिशा तय करता था, लेकिन इस बार सियासी गतिविधियों का केंद्र बदलता हुआ नजर आ रहा है। अब यह हलचल तेज प्रताप यादव के आवास पर सिमटती दिख रही है।
फिलहाल सबकी नजरें 14 जनवरी पर टिकी हैं।
राजनीतिक विश्लेषक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव इस भोज में शिरकत कर तेज प्रताप की पारिवारिक और राजनीतिक वापसी की राह खोलेंगे, या फिर यह मुलाकात केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी। मकर संक्रांति के इस बहाने लालू परिवार के भीतर जमी बर्फ पिघलेगी या नहीं, इसका जवाब दही-चूड़ा भोज में शामिल होने वाले चेहरों से ही साफ होगा।