Jharkhand News: पेयजल घोटाले के आरोपी क्लर्क संतोष कुमार अपने पहले दिए गए बयान से मुकर गया है. जांच के दौरान उसने विभाग के इंजीनियरों और बड़े अधिकारियों की संलिप्तता स्वीकार की थी, लेकिन अब वह उस बयान को गलत बता रहा है. उसके इस रुख से मामले ने नया मोड़ ले लिया है.
ED अधिकारियों पर मारपीट का आरोप, एफआईआर दर्ज
संतोष कुमार ने अब ED अधिकारियों के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है. इस कदम के बाद प्रवर्तन निदेशालय और स्थानीय पुलिस के बीच पहले से चला आ रहा कानूनी टकराव और गहराने की आशंका जताई जा रही है.
फर्जी निकासी मामले में ED की कार्रवाई
पेयजल विभाग में फर्जी निकासी के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए ED ने पुलिस की प्राथमिकी के आधार पर ईसीआईआर दर्ज की थी. जांच में सामने आया था कि संतोष कुमार ने फर्जी कंपनी बनाकर करीब 23 करोड़ रुपये की निकासी की. इसके बाद ED ने उसके खिलाफ आरोप पत्र भी दायर किया था.
जेल में दर्ज हुआ था अहम बयान
जानकारी के अनुसार, जेल में बंद रहने के दौरान ED ने उससे पूछताछ कर उसका बयान दर्ज किया था. उस बयान में संतोष कुमार ने विभाग के इंजीनियरों और बड़े अधिकारियों के शामिल होने की बात कही थी. इसी बयान के आधार पर आगे की जांच की गई थी.
समन के बाद ED कार्यालय पहुंचा संतोष
आगे की जांच के लिए संतोष कुमार से दोबारा पूछताछ जरूरी समझी गई. ED की ओर से कई बार समन भेजे गए, लेकिन वह हाजिर नहीं हुआ. इसके बाद 12 जनवरी को दोपहर में वह ED कार्यालय पहुंचा और बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हुई.
पूछताछ के दौरान बदला रुख
ED सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान संतोष कुमार जेल में दिए गए अपने बयान से मुकर गया. उसने पेयजल घोटाले से जुड़ी किसी भी जानकारी से इनकार किया. दस्तावेज दिखाकर सवाल किए जाने पर वह असहज हो गया. पूछताछ के दौरान अचानक उसने टेबल पर रखे पानी के जग से अपने सिर पर वार करने की कोशिश की. रोकने के बावजूद उसके सिर में हल्की चोट आई. इसके बाद उसे सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे फिट बताया.
मेडिकल जांच के बाद फिर हुई पूछताछ
मेडिकल जांच के बाद संतोष कुमार घर जाने के बजाय दोबारा ED कार्यालय पहुंचा और बयान दर्ज कराया. पूछताछ पूरी होने के बाद उसे छोड़ दिया गया. इसके बाद उसने ED अधिकारियों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई. संतोष कुमार की शिकायत के बाद ED और पुलिस के बीच कानूनी विवाद और बढ़ने की आशंका है. इससे पहले भी जमीन से जुड़े एक मामले में ED अधिकारियों पर घूस और मारपीट के आरोप में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है.
सीबीआई जांच की मांग पर हाईकोर्ट में मामला
ED की ओर से अपने खिलाफ दर्ज सभी मामलों की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. इस मामले में अभी तक हाईकोर्ट का कोई अंतिम फैसला नहीं आया है.
अदालत की भूमिका इस पूरे विवाद में अहम साबित होगी
संतोष कुमार के बयान से पलटने और ED अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों ने पेयजल घोटाले की जांच को और जटिल बना दिया है. अब यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जांच एजेंसियों के बीच कानूनी टकराव का रूप लेता दिख रहा है. आने वाले दिनों में अदालत की भूमिका इस पूरे विवाद में अहम साबित होगी.