Ranchi News : सहायक शिक्षक नंदू राम की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने पलामू जिला प्रशासन पर नाराजगी जताई है। अदालत ने आदेश का पूर्ण पालन नहीं होने पर पलामू के उपायुक्त (डीसी) को 2 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
बकाया वेतन और सेवा लाभ नहीं मिलने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश पर पलामू के जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) अदालत में उपस्थित हुए और अपना जवाब दाखिल किया। हालांकि कोर्ट उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। अदालत ने पूछा कि जब एकल पीठ के आदेश और उसके खिलाफ दायर राज्य सरकार की अपील दोनों का निपटारा हो चुका है, तब भी आदेश का पूर्ण पालन क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शिक्षक की पुनर्बहाली के साथ उन्हें बकाया वेतन और सभी सेवा लाभ भी दिए जाने चाहिए थे।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी ने अदालत को बताया कि हाई कोर्ट रूल 393 के तहत नोटिस मिलने के बाद मई 2026 में नंदू राम को दोबारा सेवा में लिया गया, लेकिन नौकरी से बाहर रहने की अवधि का वेतन और अन्य लाभ अब तक नहीं दिए गए हैं।
सरकार की अपील खारिज होने के बाद भी अधूरा रहा आदेश का अनुपालन
मामले के अनुसार, नंदू राम की नियुक्ति 31 दिसंबर 1999 को पलामू के विश्रामपुर स्थित सरकारी मध्य विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में हुई थी। करीब पांच वर्ष सेवा देने के बाद वह गंभीर अवसाद से पीड़ित हो गए और इलाज के लिए लंबी छुट्टी पर चले गए। स्वस्थ होने के बाद 19 जनवरी 2012 को उन्होंने विद्यालय में योगदान देने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कार्यभार ग्रहण नहीं करने दिया गया और बाद में सेवा से हटा दिया गया।
इसके बाद नंदू राम ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए पुनर्बहाली और सभी बकाया लाभ देने का आदेश दिया था। राज्य सरकार की अपील भी खंडपीठ ने खारिज कर दी, लेकिन आदेश का पूर्ण अनुपालन नहीं होने पर अब हाई कोर्ट ने पलामू के डीसी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।