Ranchi News : माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभ्यर्थी चाहें तो पुनर्परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया।यह मामला अर्चना कुमारी और अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने जेएसएससी द्वारा 23 अप्रैल 2026 को जारी नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें 2819 अभ्यर्थियों को पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया था।
आईपी एड्रेस में हैकिंग मिलने के बाद लिया गया पुनर्परीक्षा का फैसला
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से कोर्ट को बताया गया कि परीक्षा कंप्यूटर आधारित थी और 24 हजार परीक्षार्थियों में से 2819 अभ्यर्थियों के आईपी एड्रेस में हैकिंग पाई गई थी। इसी कारण आयोग ने 8 और 9 मई को पुनर्परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया।
आयोग की ओर से यह भी बताया गया कि संबंधित अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड जारी कर दिए गए हैं। वहीं याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बिना दोषी अभ्यर्थियों और परीक्षा केंद्रों की पहचान किए सभी को पुनर्परीक्षा देने के लिए बाध्य करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
कोर्ट ने जून तक रिजल्ट जारी करने का दिया निर्देश
हाईकोर्ट ने पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि इच्छुक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार और जेएसएससी को निर्देश दिया कि इस वर्ष जून माह तक परीक्षा का परिणाम जारी किया जाए।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मॉडल आंसर जारी करने और उस पर आपत्ति दर्ज करने का अवसर देने की भी मांग की थी। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और अभ्यर्थियों की नजर अब पुनर्परीक्षा और रिजल्ट पर टिकी हुई है।