Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने पारा शिक्षकों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि जो पारा शिक्षक बाद में नियमित चयन प्रक्रिया के जरिए इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक बने, उनकी पारा शिक्षक के रूप में दी गई संविदा सेवा भी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना में शामिल की जाएगी।
यह फैसला न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने मानिक चंद्र मंडल, उत्पल कुमार मुखर्जी और अबदुल हमीद अंसारी की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को सभी याचिकाकर्ताओं की संविदा सेवा को पेंशन योग्य मानते हुए पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की दोबारा गणना कर भुगतान करने का निर्देश दिया है।
8 सप्ताह में भुगतान का आदेश, 6 प्रतिशत ब्याज भी मिलेगा
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के आठ सप्ताह के भीतर सभी सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान किया जाए। साथ ही सेवानिवृत्ति की तिथि से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी दिया जाए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन और शिवानी भारद्वाज ने पक्ष रखा। मामले में बताया गया कि याचिकाकर्ताओं ने 8 से 12 वर्ष तक पारा शिक्षक के रूप में कार्य किया था। इसके बाद नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से उनकी नियुक्ति इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक के पद पर हुई और 9 से 10 वर्ष की नियमित सेवा के बाद वे सेवानिवृत्त हुए। हालांकि सरकार ने उनकी पूर्व संविदा सेवा को पेंशन में शामिल नहीं किया था।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पारा शिक्षक के रूप में दी गई सेवा और नियमित सेवा एक ही विभाग में बिना किसी वास्तविक अंतराल के जारी रही। साथ ही नियमित नियुक्ति के लिए पूर्व संविदा सेवा आवश्यक पात्रता का हिस्सा थी। इसलिए उस सेवा को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से अलग नहीं किया जा सकता।