National News: टाटा समूह ने अपने इतिहास में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को तीसरा कार्यकाल देने का रास्ता साफ कर दिया है. यह फैसला इसलिए खास है क्योंकि समूह की परंपरागत सेवानिवृत्ति नीति के तहत 65 वर्ष की उम्र के बाद शीर्ष पद पर बने रहना संभव नहीं होता. लेकिन चंद्रशेखरन के नेतृत्व में चल रहे लंबे रणनीतिक प्रोजेक्ट्स और उनकी उपलब्धियों को देखते हुए इस नियम को पहली बार शिथिल किया जा रहा है.
चंद्रशेखरन फिलहाल अपने दूसरे कार्यकाल में हैं, जो फरवरी 2027 में समाप्त होना है. विस्तार मिलने के बाद वे निर्धारित आयु सीमा पार करने के बावजूद कार्यकारी चेयरमैन के रूप में बने रहेंगे. इस निर्णय के पीछे तीन प्रमुख क्षेत्र बताए जा रहे हैं जिनमें टाटा समूह बड़े पैमाने पर काम कर रहा है – सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी प्रोजेक्ट्स और एयर इंडिया का पूर्ण कायाकल्प. समूह का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स को ऐसे समय में नेतृत्व की निरंतरता की जरूरत है जब वे निर्णायक मोड़ पर हैं.
नोएल टाटा और वेनु श्रीनिवासन का प्रस्ताव
जानकारी के अनुसार, 11 सितंबर को हुई टाटा ट्रस्ट की बैठक में नोएल टाटा और वेनु श्रीनिवासन ने यह प्रस्ताव रखा कि चंद्रशेखरन को तीसरा कार्यकाल दिया जाना चाहिए ताकि समूह के बड़े रूपांतरणकारी कार्यों में कोई व्यवधान न आए. बैठक में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ. हालांकि औपचारिक घोषणा फरवरी 2026 में की जाएगी, जब नए कार्यकाल का समय निर्धारित होता है.
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब टाटा सन्स को लेकर एक आंतरिक बहस जारी है कि इसे सार्वजनिक कंपनी बनाया जाए या निजी ही रखा जाए. जुलाई में पास प्रस्ताव में कंपनी को निजी रखने की सिफारिश की गई थी, लेकिन अब कुछ ट्रस्टी इसे फिर से विचार के लिए उठा रहे हैं. इस अनिश्चितता के बीच मजबूत नेतृत्व की भूमिका को समूह ने अत्यधिक महत्त्वपूर्ण माना है.
वर्तमान हालात में आवश्यक कदम
कई उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भले ही परंपरा के विपरीत हो, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह पूरी तरह तर्कसंगत है. कैटालिस्ट एडवाइजर्स के केतन दलाल का कहना है कि टाटा समूह इस समय एक बदलाव की दहलीज पर है. एक ओर एयर इंडिया की जटिल चुनौतियां हैं, दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और संभावित आईपीओ की तैयारी. ऐसे में स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता अवश्यंभावी है.
चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा सन्स का नेतृत्व संभाला था. टीसीएस से आए इस प्रोफेशनल चेयरमैन के कार्यकाल में समूह ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है. पिछले पांच वर्षों में टाटा समूह का राजस्व लगभग दोगुना हुआ है, जबकि शुद्ध लाभ और बाजार पूंजीकरण तीन गुना तक बढ़ा है. वित्त वर्ष 2024-25 में समूह की कुल आय 15.34 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 1.13 लाख करोड़ रुपये रहा.
विस्तार की दिशा में बढ़ा समूह
हालांकि हाल के एक वर्ष में बाजार मूल्य में गिरावट दर्ज हुई है जिसका बड़ा कारण टीसीएस के शेयरों में लगभग 30 प्रतिशत गिरावट रही, फिर भी चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा सन्स की नेटवर्थ 2018 के 43,252 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.49 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुकी है. उनके कार्यकाल में समूह ने कई नए क्षेत्रों में प्रवेश किया है. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के माध्यम से सेमीकंडक्टर निर्माण, टाटा डिजिटल के तहत सुपर-ऐप टाटा न्यू, और क्रोमा, बिगबास्केट, 1एमजी और टाटा क्लिक जैसे प्लेटफॉर्म का विस्तार इसी रणनीति का हिस्सा रहा.
एयर इंडिया की वापसी समूह के लिए ऐतिहासिक कदम था. विस्तारा और एयरएशिया इंडिया का विलय कर एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का नया स्वरूप तैयार किया गया. इसके अलावा समूह ने तेजस नेटवर्क्स का अधिग्रहण कर भारत में संपूर्ण स्वदेशी दूरसंचार नेटवर्क स्टैक विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया है. वहीं भारत और ब्रिटेन में बैटरी गीगाफैक्ट्रीज के निर्माण पर भी बड़े निवेश किए जा रहे हैं.
टाटा समूह का यह निर्णय इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में वह केवल परंपराओं पर नहीं, बल्कि वास्तविक कारोबारी आवश्यकताओं और दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर आधारित फैसले लेने को तैयार है. एन चंद्रशेखरन का यह तीसरा कार्यकाल भारत की सबसे पुरानी कॉर्पोरेट संस्थाओं में से एक के लिए एक नए युग की शुरुआत हो सकता है.