Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति को हिला देने वाले चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के करीबी और उनके पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी प्रिंस सिंह को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया. अधिकारियों के मुताबिक उसे उत्तर प्रदेश से पकड़ा गया है. इस हाई प्रोफाइल मर्डर केस की जांच पहले से ही कई राज्यों तक फैल चुकी थी और अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में बड़े खुलासों की उम्मीद बढ़ गई है.
चुनावी माहौल के बीच हुई थी चंद्रनाथ रथ की हत्या
चंद्रनाथ रथ की हत्या छह मई को मध्यग्राम इलाके में गोली मारकर की गई थी. यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के ठीक दो दिन बाद हुई थी, जिसके बाद राज्य की राजनीति में तनाव और बढ़ गया था.
हत्या के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया था. विपक्ष ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए थे, जबकि सरकार ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई शुरू की.
जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय एजेंसी के हाथों में गई
मामले में बढ़ते दबाव और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए जांच बाद में केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई. अधिकारियों के अनुसार दिल्ली के विशेष अपराध विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की अगुवाई में सात सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया गया है. यह टीम हत्या की साजिश, आरोपियों के नेटवर्क और राज्य से बाहर जुड़े लिंक की जांच कर रही है. एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हत्या के पीछे सिर्फ आपराधिक साजिश थी या इसके तार किसी बड़े राजनीतिक या संगठित नेटवर्क से जुड़े हैं.
यूपीआई ट्रांजैक्शन से मिला आरोपियों तक पहुंचने का सुराग
जांच के दौरान पुलिस को एक अहम डिजिटल सुराग मिला, जिसने पूरे केस की दिशा बदल दी. जांच टीम को पता चला कि हत्या में इस्तेमाल की गई संदिग्ध कार घटना से पहले बाली टोल प्लाजा से गुजरी थी. टोल प्लाजा पर कार में सवार एक व्यक्ति ने यूपीआई के जरिए भुगतान किया था. इसी डिजिटल ट्रेल के आधार पर जांच एजेंसियों ने संदिग्धों की पहचान शुरू की. इसके बाद तकनीकी निगरानी, मोबाइल लोकेशन और अन्य डिजिटल ट्रैकिंग की मदद से टीम उत्तर प्रदेश और बिहार तक पहुंची.
बिहार और यूपी से पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं तीन आरोपी
इससे पहले पश्चिम बंगाल पुलिस इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य को बिहार के बक्सर से पकड़ा गया था, जबकि तीसरे आरोपी राज सिंह को उत्तर प्रदेश के बलिया से गिरफ्तार किया गया था. जांच में यह भी सामने आया था कि हमलावर पश्चिम बंगाल के बाहर के थे. इसी वजह से एसआईटी की अलग अलग टीमें कई राज्यों में भेजी गई थीं. तीनों आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत हत्या, अवैध हथियार रखने और आपराधिक साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
प्रिंस सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब बड़े खुलासों की उम्मीद
मुख्य आरोपी प्रिंस सिंह की गिरफ्तारी को जांच में बड़ी सफलता माना जा रहा है. अधिकारियों का मानना है कि उससे पूछताछ में हत्या की पूरी साजिश, फंडिंग और नेटवर्क को लेकर अहम जानकारी मिल सकती है.
फिलहाल एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या की प्लानिंग कहां हुई थी और इसमें कितने लोग शामिल थे. साथ ही इस बात की भी जांच हो रही है कि आरोपियों को किसी बड़े गिरोह या राजनीतिक संरक्षण का समर्थन तो नहीं मिला था.
पत्थरबाजी पर भी सख्त दिखे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी
इसी बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में बढ़ती पत्थरबाजी की घटनाओं पर भी कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने सोमवार को कहा कि जिस तरह जम्मू कश्मीर में पत्थरबाजी पर सख्ती की गई, उसी तरह पश्चिम बंगाल में भी ऐसी घटनाओं को पूरी तरह खत्म किया जाएगा. उनका यह बयान कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए पथराव के बाद आया है. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी.
राजनीतिक और सुरक्षा एजेंसियों दोनों की नजर इस केस पर
चंद्रनाथ रथ हत्याकांड अब सिर्फ एक मर्डर केस नहीं रह गया है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की राजनीति, कानून व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा टेस्ट बन चुका है. मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब सभी की नजर आगे की जांच और संभावित खुलासों पर टिकी हुई है.