Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने डोरंडा स्थित पुराने हाईकोर्ट भवन के एक हिस्से को मध्यस्थता कार्यवाहियों के लिए उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. इस संबंध में "डोरंडा स्थित पुराने हाईकोर्ट भवन का मध्यस्थता कार्यवाहियों हेतु उपयोग नीति, 2026" का प्रारूप अधिसूचित कर दिया गया है. अधिसूचना जारी होने के साथ ही यह नीति लागू हो गई है.
नई व्यवस्था के तहत पुराने हाईकोर्ट भवन का उपयोग केवल मध्यस्थता कार्यवाही के लिए किया जाएगा. हाईकोर्ट ने साफ किया है कि वह परिसर को सिर्फ एक स्थान या वेन्यू के रूप में उपलब्ध कराएगा. मध्यस्थता प्रक्रिया के संचालन, प्रबंधन या किसी विवाद के निपटारे में हाईकोर्ट की कोई भूमिका नहीं होगी.
रजिस्ट्रार जनरल को बनाया गया सक्षम प्राधिकारी
नीति के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश की ओर से नामित झारखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल इस व्यवस्था के सक्षम प्राधिकारी होंगे. परिसर आवंटन, शुल्क, प्रशासनिक निर्णय और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं का अधिकार उनके पास रहेगा.
हाईकोर्ट का उद्देश्य मध्यस्थता कार्यवाहियों के लिए एक तय और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराना है, ताकि पक्षकारों और मध्यस्थों को सुविधा मिल सके.
पहली मंजिल पर दो कक्ष उपलब्ध, प्रतिदिन तय किया गया शुल्क
फिलहाल पुराने हाईकोर्ट भवन की पहली मंजिल पर दो स्थान मध्यस्थता कार्यवाही के लिए उपलब्ध कराए गए हैं.
छोटे मध्यस्थता कक्ष में 7 से 8 लोगों के बैठने की क्षमता है. इसके उपयोग के लिए 5,000 रुपए प्रतिदिन शुल्क तय किया गया है.
वहीं बड़े मध्यस्थता हॉल में 20 से अधिक लोग बैठ सकते हैं. इस हॉल का शुल्क 7,000 रुपए प्रतिदिन रखा गया है.
नीति में कहा गया है कि भविष्य में आवश्यकता के अनुसार मध्यस्थता और अन्य संबंधित कार्यवाहियों के लिए अतिरिक्त कमरे भी चिह्नित किए जा सकते हैं.
केवल मध्यस्थता के लिए होगा उपयोग, राजनीतिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक
पुराने हाईकोर्ट भवन में उपलब्ध कराए जाने वाले कक्षों का आवंटन अस्थायी होगा और यह प्रशासनिक सुविधा के अधीन रहेगा.
यह परिसर सिर्फ मध्यस्थता कार्यवाही के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा. यहां राजनीतिक बैठक, प्रेस कॉन्फ्रेंस, व्यावसायिक गतिविधि या किसी अन्य गैर-अनुमोदित कार्यक्रम की अनुमति नहीं होगी.
नीति के मुताबिक, परिसर में अभी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और खान-पान की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी. हाईकोर्ट की ओर से कोई न्यायिक कर्मचारी या स्टेनोग्राफर भी नहीं दिया जाएगा. संबंधित पक्षों को अपनी जरूरत के अनुसार इन व्यवस्थाओं का इंतजाम खुद करना होगा.
अग्रिम भुगतान के बाद मिलेगा कक्ष, संपत्ति नुकसान की संयुक्त जिम्मेदारी
मध्यस्थता कक्ष या हॉल लेने के लिए तय शुल्क का अग्रिम भुगतान अनिवार्य होगा. भुगतान झारखंड सरकार के ई-ग्रास पोर्टल पर चालान के माध्यम से किया जा सकेगा.
इसके अलावा रजिस्ट्रार जनरल के पक्ष में डिमांड ड्राफ्ट, NEFT या RTGS के जरिए भी शुल्क जमा करने का विकल्प रखा गया है.
परिसर में किसी प्रकार की संपत्ति को नुकसान पहुंचने पर संबंधित पक्षों और मध्यस्थ की संयुक्त जिम्मेदारी होगी. नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पक्षकार हाईकोर्ट के नाम या लोगो का किसी भी तरह से अनधिकृत उपयोग नहीं कर सकेंगे.