Jharkhand News: झारखंड में भीषण गर्मी के बीच बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. राज्य में बिजली की मांग 2200 मेगावाट के पार पहुंच गई है, जबकि सिस्टम के पास केवल 2000 मेगावाट ही उपलब्ध है. इस 200 मेगावाट की कमी ने जेबीवीएनएल (JBVNL) की नींद उड़ा दी है. डीवीसी कमांड एरिया के सात जिलों को छोड़कर बाकी पूरे राज्य में लोग उमस और पावर कट की दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं.
राजधानी रांची में गहराया संकट
राजधानी रांची में संकट सबसे ज्यादा गहरा है. शहर को पीक ऑवर में 550 मेगावाट बिजली की जरूरत है, लेकिन स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर के अनुसार यहां 50 मेगावाट की लगातार कमी बनी हुई है. दिन हो या रात, अघोषित बिजली कटौती और लो वोल्टेज के कारण लोग पसीने से तर-बतर हैं. राजधानी के कई इलाकों में ट्रिपिंग की समस्या इतनी बढ़ गई है कि बिजली आते ही फिर गुल हो जा रही है.
एसी-कूलर के लोड से बिगड़ा गणित
बिजली विभाग के मुताबिक, गर्मी बढ़ने से एसी और कूलर के इस्तेमाल में भारी उछाल आया है, जिससे सिस्टम पर लोड बढ़ गया है. शाम 7 बजे से रात 11 बजे के बीच डिमांड को संभालना विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रहा है. सेंट्रल पूल और राज्य के अपने स्रोतों से मांग के अनुरूप बिजली नहीं मिल पाने के कारण हर जगह लोड शेडिंग का सहारा लेना पड़ रहा है.
सिस्टम के पास नहीं है कोई ठोस विकल्प
फिलहाल जनता को इस टॉर्चर से राहत मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है. विभाग के पास बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोई ठोस बैकअप प्लान नहीं है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. अगर जल्द ही अतिरिक्त बिजली की खरीद नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में यह संकट पूरे प्रदेश को अंधेरे में धकेल सकता है.