Jharkhand News: झारखंड में हाथियों के बेहतर संरक्षण और उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए एक विशेष “हाथी पारगमन एवं उपचार केंद्र” (Elephant Transit And Treatment Centre) बनाने की पहल शुरू हो गई है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), डिजाइन और लागत का अनुमान तैयार करने की तैयारी की जा रही है. इसका मुख्य उद्देश्य हाथियों को एक ऐसा नियंत्रित वातावरण देना है, जो पूरी तरह प्राकृतिक हो.
प्राकृतिक रहन-सहन के अनुकूल होगा डिजाइन
इस केंद्र को हाथियों के मूल प्राकृतिक आवास की तरह विकसित करने की योजना है. इसके तहत बनने वाले बाड़े और घेरों का डिजाइन इस तरह तैयार किया जाएगा कि हाथियों को वहां अपने प्राकृतिक परिवेश जैसा ही अहसास हो. यह केंद्र न केवल हाथियों के उपचार में मदद करेगा, बल्कि उन्हें सुरक्षित आश्रय भी प्रदान करेगा.
बुनियादी ढांचे और सुरक्षा पर विशेष जोर
परियोजना के तहत चयनित स्थल की साफ-सफाई, जमीन का समतलीकरण और जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था की जाएगी. हाथियों की सुरक्षा और नियंत्रण के लिए केंद्र में आधुनिक बाड़ प्रणाली और मजबूत अवरोध (Reinforced Barriers) लगाए जाएंगे. इससे हाथियों के परिसर से बाहर निकलने या भागने की आशंका नहीं रहेगी, जिससे मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में भी मदद मिलेगी.
हरियाली और जल स्रोतों का निर्माण
हाथियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए परिसर के भीतर घास के मैदान, घनी झाड़ियां और पेड़ लगाए जाएंगे. इसके अलावा, हाथियों की पानी की जरूरतों और उनकी प्राकृतिक गतिविधियों के लिए कृत्रिम तालाबों या छोटी जलधाराओं का निर्माण किया जाएगा. यह सुनिश्चित करेगा कि हाथियों को हर समय पर्याप्त पानी और खेलने के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध रहे.
आधुनिक सुविधाएं और उन्नत सुरक्षा प्रणाली
केंद्र में केवल हाथियों की ही नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले श्रमिकों और डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए भी उन्नत प्रणालियां लागू की जाएंगी. पूरे परिसर के सुचारू संचालन के लिए निर्बाध पानी और बिजली जैसी आवश्यक सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी. इस केंद्र के बनने से झारखंड में घायल या भटके हुए हाथियों को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा.