Jharkhand: झारखंड सरकार राज्य में इंटरमीडिएट शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम पहल करने जा रही है। इसके तहत केवल 10वीं तक संचालित हो रहे 1711 हाई स्कूलों को प्लस टू स्कूल में परिवर्तित किया जाएगा। इस व्यापक योजना पर लगभग 2000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। अपग्रेड किए जाने वाले स्कूलों में विज्ञान, कला और वाणिज्य, तीनों संकायों में 11वीं और 12वीं की पढ़ाई शुरू होगी, जिससे छात्रों को अपने ही क्षेत्र में उच्च माध्यमिक शिक्षा का अवसर मिल सकेगा।
कक्षा 9 से 12 तक की शिक्षा एक ही विद्यालय में
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत कक्षा 9 से 12 तक की शिक्षा एक ही विद्यालय में देने का प्रावधान है। साथ ही राज्य में डिग्री कॉलेजों से इंटर की पढ़ाई बंद हो चुकी है। ऐसे में 10वीं पास विद्यार्थियों के लिए प्लस टू स्कूलों की संख्या बढ़ाना आवश्यक हो गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ड्रॉपआउट दर को कम करना और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में इंटर शिक्षा की पहुंच को मजबूत करना है।
प्लस टू स्कूल में औसतन 20 से 22 शिक्षकों की आवश्यकता
प्रत्येक प्लस टू स्कूल में औसतन 20 से 22 शिक्षकों की आवश्यकता होगी। मौजूदा शिक्षकों के अलावा नए शिक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी। कक्षा 9 से 12 तक अध्यापन के लिए संबंधित विषय में स्नातकोत्तर डिग्री, बीएड और झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा।
इस योजना से इंटर नामांकन और पंजीकरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान की भी उम्मीद है। डिग्री कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई समाप्त होने के बाद विद्यार्थियों को दाखिले में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। हाई स्कूलों के प्लस टू में उन्नयन से भविष्य में यह समस्या दूर हो सकती है।
अपग्रेडेशन की प्रक्रिया लगभग पांच वर्षों में पूरी होगी
यदि सभी 1711 स्कूलों को मंजूरी मिलती है, तो अपग्रेडेशन की प्रक्रिया लगभग पांच वर्षों में पूरी की जाएगी। इस दौरान स्कूलों में 6 से 10 अतिरिक्त कक्ष, विज्ञान प्रयोगशाला, पुस्तकालय, शौचालय, बेंच-डेस्क समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा।