Bengal Election Update : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बाद लाखों लोगों के सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया है। एक आम नागरिक के लिए वोटर कार्ड केवल मतदान का अधिकार नहीं, बल्कि देश में उसकी पहचान का अहम प्रमाण होता है। ऐसे में राज्य के 90,83,345 लोगों के नाम सूची से हटने के बाद उनके सामने अपनी वैधता को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, वहीं सीमावर्ती जिलों के लाखों परिवार इस दुविधा में हैं कि कहीं उन्हें अपने ही देश में अवैध तो नहीं माना जाएगा।
मुर्शिदाबाद से हटाए गए सबसे अधिक नाम
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा नाम मुर्शिदाबाद जिले से हटाए गए हैं, जहां 4,55,137 मतदाता सूची से बाहर हो गए। इसके बाद उत्तर 24 परगना का स्थान है, जहां 3,25,666 लोगों के नाम काटे गए हैं। इसके अलावा कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, मालदा और दक्षिण 24 परगना जैसे सीमावर्ती जिलों में भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं। जांच के दौरान पाया गया कि कई लोग मतदाता सूची में बने रहने की पात्रता खो चुके थे।
हटाए जाने नामो की संख्या में हो सकता है इजाफा
यह पूरी प्रक्रिया स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 60,06,675 मामलों की न्यायिक जांच की गई, जिनमें से 59,84,512 मामलों का निपटारा हो चुका है। इनमें 27,16,393 मतदाताओं को अयोग्य मानते हुए सूची से हटा दिया गया। वहीं 22,163 मामलों में प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद डिजिटल हस्ताक्षर बाकी हैं, जिसके बाद हटाए गए नामों की संख्या और बढ़ सकती है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें अपील करने का अंतिम मौका दिया जाएगा। इस बीच राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को 142 सीटों पर होगा। वहीं चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि लाखों लोगों के अधिकार और पहचान को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है।