Jharkhand Politics: प्रदेश कांग्रेस की प्रवक्ता सोनाल शांति ने आदिवासी मुद्दे को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की आस्था और परंपरा को सनातन से जोड़कर बाबूलाल मरांडी दशकों से चली आ रही सरना धर्मकोड की मांग को दरकिनार करने का प्रयास कर रहे हैं.
आदिवासी समाज की सामाजिक संरचना और जीवन पद्धति बेहद मजबूत
सोनाल शांति ने कहा कि आदिवासी समाज की सामाजिक संरचना और जीवन पद्धति बेहद मजबूत है और उसकी जड़ें इतनी गहरी हैं कि कोई भी ताकत उसे कमजोर नहीं कर सकती. उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार आदिवासी समुदाय को सशक्त बनाने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है और पेसा कानून लागू कर ग्रामीणों को अधिकार दिए गए हैं. अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा लागू होने से गांव स्तर पर निर्णय की शक्ति ग्रामीणों के हाथ में आई है.
बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल में तपकरा गोलीकांड और रघुवर दास के शासनकाल में पत्थलगढ़ी
कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पार्टी आदिवासी समाज को छलने और भड़काने का काम करती रही है. उन्होंने बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल में तपकरा गोलीकांड और रघुवर दास के शासनकाल में पत्थलगढ़ी आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि इन दौर में आदिवासी समाज के हजारों लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए.
धर्मांतरण के मुद्दों को आदिवासी समुदाय नकार चुका है
उन्होंने कहा कि भाजपा को आदिवासी समाज के लिए घड़ियाली आंसू बहाना बंद करना चाहिए. कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा आदिवासियों को केवल वोट बैंक मानकर अपनी राजनीतिक जागीर समझती है. सोनाल शांति ने यह भी कहा कि आदिवासी समाज के बीच भ्रम और विद्वेष फैलाने के लिए भाजपा बार-बार धर्मांतरण और मातांतरण जैसे मुद्दों को उठाती है जबकि आदिवासी समुदाय खुद इन आरोपों को नकार चुका है.
सरना धर्मकोड और पेसा कानून को लेकर झारखंड की राजनीति में बयानबाजी तेज
सरना धर्मकोड और पेसा कानून को लेकर झारखंड की राजनीति में बयानबाजी लगातार तेज हो रही है. कांग्रेस और भाजपा के बीच आदिवासी पहचान और अधिकारों को लेकर सीधा टकराव दिख रहा है. आने वाले समय में यह मुद्दा आदिवासी बहुल क्षेत्रों की राजनीति को और ज्यादा प्रभावित कर सकता है.