भरोसे का कत्ल, आरोपी कोई अजनबी नहीं
हैरानी की बात यह है कि इन अपराधों में किसी अनजान हैकर से ज़्यादा अपने शामिल हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि ज़्यादातर मामलों में आरोपी पीड़िता का कोई करीबी दोस्त, वर्तमान बॉयफ्रेंड या एक्स-बॉयफ्रेंड ही निकलता है। आपसी विवाद या बदला लेने की नीयत से भरोसे का गला घोंटकर इन तस्वीरों को वायरल किया जा रहा है।
कैसे काम करता है यह खतरनाक खेल
अपराधी सोशल मीडिया जैसे इंस्टाग्राम या फेसबुक से किसी की सामान्य फोटो उठाते हैं। AI आधारित डीपफेक टूल्स की मदद से चंद मिनटों में उसे आपत्तिजनक तस्वीरों में बदल दिया जाता है। इसके बाद टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इन्हें इतनी तेजी से फैलाया जाता है कि पीड़िता को संभलने का मौका तक नहीं मिलता।
डरें नहीं, कानून का लें सहारा
मानसिक तनाव और सामाजिक बदनामी के डर से कई महिलाएं शिकायत दर्ज नहीं करातीं, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं। साइबर सेल के अधिकारियों का कहना है कि, देरी करने से डेटा ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है। समय पर सूचना देने से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वह फोटो हटवाई जा सकती है। पुलिस पीड़िता की पहचान गुप्त रखती है।
AI प्रगति का साधन है, विनाश का नहीं
AI प्रगति का साधन है, विनाश का नहीं। यदि आप या आपके आसपास कोई इसका शिकार है, तो चुप न रहें। आपकी चुप्पी अपराधी के हौसले बुलंद करती है। सतर्क रहें, अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल को प्राइवेट रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।