Jharkhand News: खूंटी जिले में उग्रवाद की आहट एक बार फिर सुनाई दी है. रात के अंधेरे में हथियारबंद उग्रवादियों ने एक औद्योगिक इकाई को निशाना बनाकर इलाके में दहशत फैला दी. अचानक हुई गोलीबारी से लोग सहम गए और पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बन गया. घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की सक्रियता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
क्रेशर प्लांट में घुस गए और ताबड़तोड़ गोलीबारी की
खूंटी जिले के सदर थाना क्षेत्र में पीएलएफआई उग्रवादियों ने एक बार फिर हिंसक वारदात को अंजाम दिया है. 24 दिसंबर की रात चार अज्ञात हथियारबंद उग्रवादी डुगड़गिया स्थित मेसर्स नितेश शारदा क्रेशर प्लांट में घुस गए और ताबड़तोड़ गोलीबारी की. अचानक हुई फायरिंग से क्रेशर प्लांट में काम कर रहे कर्मचारी और आसपास मौजूद लोग दहशत में आ गए.
20 लाख रुपये की लेवी की मांग की गई
गोलीबारी के बाद उग्रवादियों ने क्रेशर प्लांट के कर्मचारियों को एक पत्र सौंपा. यह लेटर पीएलएफआई के जोनल सदस्य राजेश यादव के नाम से जारी बताया जा रहा है. पत्र में क्रेशर प्लांट के संचालक से 20 लाख रुपये की लेवी की मांग की गई है. साथ ही चेतावनी दी गई है कि लेवी नहीं देने की स्थिति में फौजी कार्रवाई की जाएगी.
जल्द होगी उग्रवादियों की गिरफ्तारी
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है. आसपास के इलाकों में सघन छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और उग्रवादियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं. इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है ताकि किसी दूसरी घटना को रोका जा सके.
कानून व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती
खूंटी में क्रेशर प्लांट पर हुई गोलीबारी यह दर्शाती है कि पीएलएफआई जैसे उग्रवादी संगठन अब भी औद्योगिक इकाइयों को निशाना बनाकर दहशत और लेवी के जरिए अपना प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं. खुलेआम फायरिंग कर 20 लाख रुपये की मांग करना कानून व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती है और इससे स्थानीय कारोबारियों में असुरक्षा की भावना गहराती है. हालांकि पुलिस ने घटना के बाद त्वरित कार्रवाई शुरू की है लेकिन यह घटना सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था की मजबूती पर सवाल भी खड़े करती है. यदि ऐसे मामलों में उग्रवादियों के नेटवर्क पर समय रहते निर्णायक प्रहार नहीं किया गया तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों और निवेश पर नकारात्मक असर पड़ना तय है.