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  • 2025-12-17

Jharkhand News: GRAMG योजना पर झामुमो का कड़ा ऐतराज, झारखंड को 1500 करोड़ से अधिक नुकसान का दावा

Jharkhand News: केंद्र सरकार की प्रस्तावित विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन योजना (GRAMG) को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने विरोध जताया है. पार्टी का कहना है कि मनरेगा की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होने से झारखंड को 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

झामुमो के अनुसार अभी मनरेगा के तहत मजदूरी का पूरा भुगतान केंद्र सरकार करती है, लेकिन नई प्रस्तावित योजना में मजदूरी और सामग्री मद का खर्च केंद्र और राज्य के बीच 60 और 40 प्रतिशत के अनुपात में बांटने की तैयारी है. इससे राज्य सरकार पर सीधा अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ेगा. विभागीय सूत्रों का आकलन है कि केवल सामग्री मद में ही राज्य का खर्च 700 करोड़ रुपये से अधिक बढ़ सकता है.

मनरेगा जैसे अधिकार आधारित कानून की आत्मा को कमजोर करने की कोशिश
पार्टी ने आरोप लगाया कि यह बदलाव सिर्फ फंडिंग पैटर्न तक सीमित नहीं है, बल्कि मनरेगा जैसे अधिकार आधारित कानून की आत्मा को कमजोर करने की कोशिश है. झामुमो का कहना है कि नई योजना के तहत ग्रामीण मजदूरों के काम के अधिकार को सीमित किया जाएगा और यह भी तय किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में योजना लागू होगी और किन में नहीं.

संवैधानिक अधिकारों पर हमला
झामुमो ने दावा किया कि प्रस्तावित व्यवस्था में साल के कुछ महीनों तक काम के अधिकार को रोके जाने का प्रावधान भी शामिल है. साथ ही केंद्र सरकार यह तय करेगी कि किसी राज्य को कितना बजट मिलेगा और जरूरत बढ़ने पर अतिरिक्त राशि देने से इनकार किया जा सकता है. पार्टी ने इसे सीधे तौर पर संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया है.

झारखंड के खनिज संसाधनों से होने वाली आय का उचित हिस्सा अब तक राज्य को नहीं मिला
पार्टी ने यह मुद्दा भी उठाया कि झारखंड के खनिज संसाधनों से होने वाली आय का उचित हिस्सा अब तक राज्य को नहीं मिला है. इसके बावजूद मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में राज्य से 40 प्रतिशत खर्च उठाने को कहा जा रहा है. झामुमो ने मांग की है कि पहले केंद्र सरकार झारखंड के बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये और अन्य योजनाओं की लंबित राशि जारी करे.

झामुमो ने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा कानून को खत्म करने या कमजोर करने की कोशिश हुई, तो झारखंड के मजदूर सड़क से संसद तक आंदोलन करने को मजबूर होंगे.

मनरेगा जैसे कानून ग्रामीण रोजगार की रीढ़
यह विवाद सिर्फ एक नई योजना का नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय अधिकारों और जिम्मेदारियों के टकराव को दिखाता है. मनरेगा जैसे कानून ग्रामीण रोजगार की रीढ़ माने जाते हैं. खर्च का बड़ा हिस्सा राज्यों पर डालने से कमजोर आर्थिक स्थिति वाले राज्यों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा. झारखंड जैसे खनिज संपन्न लेकिन संसाधन वितरण को लेकर असंतुष्ट राज्य में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर बड़ा आंदोलन खड़ा कर सकता है.
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