Jharkhand News: झारखंड में राज्य सरकार ने 15 दिसंबर सोमवार से धान खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है. शुरुआती दो दिनों में ही सरकार ने धान खरीद को लेकर आंकड़े जारी कर दिए हैं. मंगलवार शाम पांच बजे तक कुल 55 हजार 766.11 क्विंटल धान की खरीद दर्ज की गई है. इस बार सरकार ने 60 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य तय किया है.
2 लाख से अधिक किसानों कराया है पंजीकरण
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में अब तक 2 लाख 51 हजार 935 किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीकरण कराया है. दो दिनों के भीतर 10 हजार 914 किसानों को एसएमएस के माध्यम से सूचना भी भेजी गई है ताकि वे तय केंद्रों पर अपनी फसल बेच सकें.
इस साल सरकार किसानों से 2450 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है. पिछले वर्ष यह दर 2400 रुपए प्रति क्विंटल थी. पूरे राज्य में धान खरीद के लिए 801 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं ताकि किसानों को ज्यादा परेशानी न हो.
हालांकि बीते वर्षों का अनुभव सरकार के लिए चुनौती भरा रहा है. पिछले तीन सालों में सरकार धान खरीद का निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं कर सकी. खासकर 2022-23 और 2023-24 के दौरान सूखे की स्थिति और किसानों की कम भागीदारी के कारण खरीद प्रभावित हुई. इन दोनों वर्षों में लक्ष्य का केवल करीब 29 प्रतिशत ही पूरा हो सका.
वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्थिति कुछ बेहतर रही और 60 लाख क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले 40.8 लाख क्विंटल धान की खरीद हुई जो लगभग 67 प्रतिशत रही. सरकार को उम्मीद है कि इस साल संशोधित दर और बेहतर व्यवस्था के कारण खरीद में बढ़ोतरी होगी.
हजारीबाग में सबसे ज्यादा हुई धान खरीद
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा धान खरीद हजारीबाग जिले से हुई है जहां 9558.93 क्विंटल धान की खरीद दर्ज की गई. इसके बाद कोडरमा में 7439.02 क्विंटल और गिरिडीह में 5350.66 क्विंटल धान खरीदा गया है. रांची में 3849.47 क्विंटल और रामगढ़ में 3422.51 क्विंटल धान की खरीद हुई है. लातेहार 3491.47 क्विंटल और लोहरदगा 3031.3 क्विंटल के साथ आगे रहे. अन्य जिलों में भी अलग-अलग मात्रा में धान की खरीद दर्ज की गई है.
अभी खरीद की रफ्तार धीमी
सरकार की ओर से धान खरीद की दर बढ़ाना और केंद्रों की संख्या बढ़ाना किसानों को आकर्षित करने की कोशिश मानी जा रही है. हालांकि शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि अभी खरीद की रफ्तार धीमी है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार इस बार 60 लाख क्विंटल का लक्ष्य हासिल कर पाती है या फिर बीते वर्षों की तरह लक्ष्य अधूरा ही रह जाता है.