Chandil News: चांडिल प्रखंड के चैनपुर गांव के कलाकार सौरभ प्रामाणिक ने अपनी नवीनतम कृति “राष्ट्र माता” के साथ भारतीय कला जगत में एक नया अध्याय जोड़ा है. यह पेंटिंग न केवल अवनींद्रनाथ टैगोर की “भारत माता” की पारंपरिक मानवीकृत छवि से पूरी तरह अलग है, बल्कि यह भारत में “राष्ट्र माता” के अमूर्त रूप का पहला चित्रण होने का गौरव भी रखती है.
सौरभ प्रामाणिक की कला की विशेषता यह है कि वह अपनी पेंटिंग में किसी भी चीज को प्रत्यक्ष रूप से नहीं दर्शाते, बल्कि प्रतीकात्मक और काल्पनिक तत्वों के माध्यम से गहन विचार प्रस्तुत करते हैं. उन्होंने अपनी कृति में राष्ट्र की चेतना को भौतिक रूप में नहीं, बल्कि अमूर्त शक्ति और दार्शनिक सिद्धांतों के रूप में प्रस्तुत किया है.
पेंटिंग का केंद्र एक श्वेत साड़ी में लिपटा स्तंभ है, जो राष्ट्र की अखंडता और त्याग को दर्शाता है. सबसे अनूठा प्रयोग रंगों का है: कलाकार ने राष्ट्रीय ध्वज के तीनों रंगों (केसरिया, सफेद, हरा) को सीधे न दिखाते हुए, उनके मूल निर्माणकारी रंगों को दर्शाया है. ये रंग (जैसे पीला, लाल, नीला) ऊर्जा तरंगों के रूप में फूटते हैं, जो ज्ञान, बलिदान और स्थिरता के संयोजन से उत्पन्न होते हैं. यह कलात्मक चयन रंगों के पीछे छिपे मूल विचार को उजागर करता है.
अशोक चक्र राष्ट्र के अटल नियम (Dharma) का प्रतीक है. वहीं, बाघ की खुरदरी धारियां राष्ट्र की शक्ति को दर्शाती हैं, जबकि नीचे की गहरी जड़ें और कमल भारत की प्राचीन विरासत और आशा का आधार हैं. “राष्ट्र माता” का यह अमूर्त स्वरूप भारतीय कला के आधुनिक चिंतन में एक ऐतिहासिक पहल है.