Dhanbad News: धनबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष पर रिश्वत मांगने और अधिवक्ताओं का अपमान करने का गंभीर आरोप लगा है. आरोपों के मुताबिक फोरम अध्यक्ष ने एक अधिवक्ता से केस का आदेश पास करने के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी. इतना ही नहीं रिश्वत नहीं देने पर उन्हें खुलेआम अपमानित भी किया गया. इस मामले में अधिवक्ता ने मुख्य सचिव, झारखंड सरकार को लिखित शिकायत दी है जिसके बाद मुख्य सचिवालय ने पूरे मामले की जांच कर विधि विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.
जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता अधिवक्ता उदय कुमार भट्ट पिछले 25 वर्षों से धनबाद व्यवहार न्यायालय में वकालत कर रहे हैं. उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा है कि 20 अगस्त 2025 को वे उपभोक्ता फोरम में दर्ज केस संख्या C.C. 170/2024 में बहस के लिए दोपहर 12 बजे से 2:15 बजे तक उपस्थित हुए थे. लेकिन फोरम अध्यक्ष ने उनके केस की बहस सुनने से इनकार कर दिया. जब अधिवक्ता ने आग्रह किया तो अध्यक्ष ने कथित तौर पर धमकी भरे लहजे में कहा कि तुम मेरी बात नहीं मानते तो मैं तुम्हारी बहस क्यों सुनूं.
अधिवक्ता भट्ट का कहना है कि इससे पहले की तारीख पर फोरम अध्यक्ष ने उन्हें अपने कक्ष में बुलाकर 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी. जब उन्होंने रिश्वत देने से मना कर दिया तो अध्यक्ष ने धमकी दी थी कि देखते हैं तुम कितने चालाक बनते हो, तुम्हें सबक सिखाता हूं. अधिवक्ता ने बताया कि 20 अगस्त को हुई अगली सुनवाई में न सिर्फ उनके केस की बहस से इनकार किया गया बल्कि पूरे अधिवक्ता वर्ग को अपमानित करते हुए फोरम अध्यक्ष ने कहा कि “तुम तो क्या, धनबाद के सारे अधिवक्ता लिचड़ प्रवृत्ति के हैं, तुम्हारा केस दूसरे जिले में ट्रांसफर करवा दूंगा”.
अधिवक्ता उदय कुमार भट्ट का कहना है कि अध्यक्ष के इन शब्दों से अधिवक्ता समाज की गरिमा को गहरी ठेस पहुंची है. उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है. वहीं पूरे घटनाक्रम के बाद धनबाद के अधिवक्ता समाज में आक्रोश व्याप्त है और फोरम अध्यक्ष के रवैये पर कई वकीलों ने आपत्ति जताई है.
सूत्रों के अनुसार मुख्य सचिवालय ने शिकायत के आधार पर विधि विभाग से रिपोर्ट तलब की है. वहीं अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या खुलासा होता है और क्या उपभोक्ता फोरम जैसे संवेदनशील संस्थान की साख बचाने के लिए सरकार सख्त कदम उठाती है या नहीं.
धनबाद का यह मामला सिर्फ रिश्वतखोरी का नहीं बल्कि न्याय प्रणाली पर जनता के भरोसे से जुड़ा है. उपभोक्ता फोरम का गठन आम नागरिकों को राहत देने के लिए हुआ था, लेकिन अगर वहां भी भ्रष्टाचार और व्यक्तिगत अपमान की घटनाएं सामने आएं तो न्याय की पूरी भावना पर सवाल उठता है. यह मामला दिखाता है कि निचले स्तर के न्यायिक तंत्र में भी पारदर्शिता और निगरानी की कितनी सख्त जरूरत है. अगर इस प्रकरण पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो आम जनता का भरोसा इन संस्थानों से पूरी तरह उठ सकता है.