उपायुक्त को लिखे पत्र में सरयू राय ने कहा है कि जमशेदपुर से प्रकाशित एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र में “पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की 18 लाख की प्रतिबंधित ग्लॉक पिस्टल जब्त”मामले के बारे में बोले है। सरयू राय ने लिखा है कि प्रतिबंधित आग्नेयास्त्र रखना कानूनन जुर्म है, दंडनीय अपराध है, इसे बेचना और इसका लाइसेंस जारी करना भी दंडनीय अपराध है, इससे आप अवगत हैं। इंडियन आर्म्स एक्ट-1959 की धारा-25 में इसके लिए दंड का प्रावधान विहित है।
सुलभ संदर्भ हेतु इंडियन आर्म्स एक्ट- 1959 की धारा-25 का प्रासंगिक प्रावधान इस प्रकार से है
भारतीय शस्त्र अधिनियम, 1959 की धारा 25, आग्नेयास्त्रों और गोला-बारूद से संबंधित विभिन्न अपराधों, जैसे कि उन्हें अवैध रूप से प्राप्त करना, रखना या ले जाना, साथ ही कानून के विरुद्ध उन्हें बेचना या परिवहन करना, के लिए दंड का प्रावधान करती है। दंड विशिष्ट अपराध के आधार पर अलग-अलग होते हैं, लेकिन इसमें न्यूनतम पाँच वर्ष से लेकर संभावित आजीवन कारावास तक की सजा और जुर्माना शामिल हो सकता है।
दंडात्मक प्रावधान निम्नवत है
भारतीय शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत दंड, प्राप्त करना, रखना या ले जाना निषिद्ध है, शस्त्र: कम से कम पांच वर्ष का कारावास, जो दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा, और जुर्माना। प्रस्तावित संशोधनों के तहत इसे बढ़ाकर सात वर्ष से कम नहीं तथा संभवत 14 वर्ष तक किया जाएगा।
सरयू राय ने लिखा कि उपर्युक्त से स्पष्ट है कि प्रतिबंधित आग्नेयास्त्र धारक को कम से कम 5 वर्ष की क़ैद की सजा होगी जो 7 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन के मुताबिक़ यह सज़ा 7 वर्ष से कम की नहीं होगी और इसे 24 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
राय ने लिखा कि इस संबंध में उन्होंने दिनांक
28.04.2023 को पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को इस बारे में पत्र लिखा था और उनसे अवैध आग्नेयास्त्र धारक के विरुद्ध क़ानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
राय के अनुसार, इसके पूर्व झारखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, बंगाल के अपर मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिरीक्षक, गृह मंत्रालय के अपर सचिव आदि को पत्र लिख कर बताया था कि जमशेदपुर के कदमा निवासी तत्कालीन मंत्री बन्ना गुप्ता ने प्रतिबंधित ग्लॉक पिस्तौल रखा है जो कानूनन जुर्म है और दंडनीय अपराध है।
उस समय जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टे उन्हें प्रतिबंधित पिस्तौल का लाइसेंस जारी कर दिया
अब जबकि यह प्रतिबंधित पिस्तौल जब्त कर ली गई है तब यह ज़रूरी हो गया है कि आर्म्स एक्ट के अधीन इसके अवैध धारक पर, इसे उन्हें बेचने वाले पर, इसका अवैध लाइसेंस उन्हें जारी करने वाले पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाय। आप सहमत होंगे कि कानून की नज़र में सभी बराबर हैं।
सरयू राय ने लिखा कि कोई अपराधी इसलिए क़ानूनी कार्रवाई से मुक्त नहीं किया जा सकता कि वह सरकार में मंत्री पद पर है. प्रशासन को समझना चाहिए कि गम्भीर अपराध की सजा निर्धारित करने में पद और क़द आड़े नहीं आता।
सरयू राय ने उम्मीद जताई कि
आर्म्स एक्ट का उल्लंघन कर अवैध आग्नेयास्त्र ग्लॉक पिस्तौल- रखने वाले, बेचने वाले और लाइसेंस देने वाले के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई कर कर्तव्य परायणता का परिचय देंगे।