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  • 2025-10-07

Big News: फर्जी GST बिल बनाने वालों के लिए राहत, ED अब नहीं करेगी स्वतः कार्रवाई

Big News: देश में अब फर्जी GST बिल बनाने वालों के लिए राहत का रास्ता खुल गया है क्योंकि इनके खिलाफ अब IPC BNS की धाराओं के तहत थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं होगी और प्रवर्तन निदेशालय PMLA के तहत स्वतः जांच भी नहीं कर सकेगा. वित्तीय वर्ष 2024-25 में फर्जी GST बिल से सरकार को 58,772 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, लेकिन अब फर्जी GST बिल बनाने वालों के खिलाफ थाना में प्राथमिकी दर्ज करने या ED द्वारा मामले की जांच के लिए Principal DG DGGI से अनुमति लेना अनिवार्य होगा. यह आदेश Additional Director मनदीप कुमार बातिश के हस्ताक्षर से जारी किया गया है.


पहले Director General of Goods and Services Tax Intelligence DGGI के तहत फर्जी GST बिल बनाने वालों के खिलाफ थाने में IPC BNS के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं होती थी और इस प्राथमिकी के आधार पर ED ECIR दर्ज कर मामले की जांच करती थी. अब Additional Director के आदेश के अनुसार, केवल GST अधिनियम की धाराओं के तहत ही कार्रवाई की जाएगी क्योंकि GST अधिनियम की कोई भी धारा PMLA के Schedule Offence में शामिल नहीं है.

GST बिल बनाने वालों को अब आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा क्योंकि GST अधिनियम की धारा 122(1A) के तहत जेल की सजा नहीं दी जाती बल्कि केवल आर्थिक दंड लगाया जाता है. यदि किसी मामले में 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये का फर्जी बिल बनता है तो अधिकतम एक साल की सजा हो सकती है, 2 करोड़ से 5 करोड़ रुपये के मामले में छह महीने से तीन साल तक की सजा का प्रावधान है और पांच करोड़ रुपये से अधिक के मामले में छह महीने से पांच साल तक जेल का प्रावधान है.

इससे पहले IPS BNS की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज होने पर ED खुद ECIR दर्ज कर PMLA की धाराओं के तहत पांच से सात साल तक जेल की सजा दिला सकती थी और जालसाजी के माध्यम से अर्जित संपत्ति को स्थायी रूप से जब्त करने का अधिकार था. लेकिन अब GST इंटेलिजेंस के अधिकारियों को किसी भी फर्जी GST बिल के मामले में थाना में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए DGGI के Principal Director से अनुमति लेना जरूरी होगा और इसके लिए आरोपियों की भूमिका, दस्तावेजी सबूत और उचित कारण पेश करना होगा.

संसद में फर्जी GST बिल से हुए नुकसान के सवाल पर वित्त मंत्रालय ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 2.23 लाख करोड़ रुपये टैक्स चोरी हुई, जिनमें 30,056 मामले सामने आए और इनमें से आधे मामलों में फर्जी GST बिल का सहारा लिया गया. इसी वर्ष अप्रैल से अक्टूबर तक 17,000 प्रतिष्ठानों के जरिए 35,132 करोड़ रुपये की चोरी हुई जबकि 2023-24 में 30,000 प्रतिष्ठानों के जरिए 44,015 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ में आई थी. 2018-19 से 2022-23 तक फर्जी GST बिल के जरिए ITC का 1,15,457 करोड़ रुपये का गलत लाभ लिया गया.

नए आदेश के अनुसार DGGI द्वारा दर्ज मामले की सूचना CEIB और REIC को साझा की जाएगी और इसके आधार पर अन्य जांच एजेंसियां अपने-अपने कानून के तहत कार्रवाई कर सकती हैं. GST कानून की जांच में थाने में IPC BNS की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने पर ED ECIR दर्ज कर सकती थी, लेकिन अब GST को विशेष अधिनियम माना गया है और टैक्स चोरी के अपराध को PMLA में शामिल करना व्यापारिक वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है.

विशेष और सामान्य अधिनियम में समान अपराध होने पर विशेष अधिनियम को प्राथमिकता दी जाएगी और DGGI अधिकारियों द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज करने से उनका कार्यभार बढ़ जाएगा. GST परिषद का दृष्टिकोण रहा है कि करदाताओं पर आपराधिक जिम्मेदारी थोपने में सतर्क रहना चाहिए. यदि किसी नकली चालान मामले को ED को भेजना हो या स्थानीय पुलिस में FIR दर्ज करनी हो, तो इसके लिए Principal DG DGGI की पूर्व अनुमति जरूरी होगी और तथ्य, आरोपियों की भूमिका और दस्तावेजी प्रमाण पेश करना अनिवार्य होगा.

इस आदेश के आलोक में नकली चालान के मामलों को ED को संदर्भित करते समय या स्थानीय पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करते समय दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा जिससे फर्जी GST बिल से जुड़े मामलों में जांच प्रक्रिया व्यवस्थित और नियमों के अनुसार हो.

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