Chatra: केरेडारी प्रखंड के चट्टीबरियातू कोल माइंस से जुड़ी कोयला ढुलाई में एक गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। कोल ट्रांसपोर्टिंग में लगी गोदावरी कंपनी पर आरोप है कि वह कोयले के स्थान पर मिट्टी और मलवे की ढुलाई कर रही है। इस कथित हेराफेरी से केंद्र और राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है, जबकि ट्रांसपोर्टिंग कंपनी अवैध रूप से लाभ कमा रही है।
अच्छी गुणवत्ता वाले कोयले की अवैध रूप से ब्लैक मार्केटिंग
बताया जाता है कि गोदावरी कोल ट्रांसपोर्टिंग कंपनी को चट्टीबरियातू कोल माइंस से कटकमसांडी रेलवे साइडिंग तक कोयले के परिवहन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन वास्तविकता यह है कि कंपनी द्वारा कोयले की जगह मिट्टी और मलवा ढोया जा रहा है। वहीं, अच्छी गुणवत्ता वाले कोयले को अवैध रूप से ब्लैक मार्केट में बेचने की भी सूचना है।
सरकार को हुआ राजस्व का भारी नुकसान
सूत्रों के अनुसार, ब्लैक में बेचे गए कोयले की क्षतिपूर्ति दिखाने के लिए मिट्टी और मलवे को कोयले में मिलाकर डंप किया जा रहा है। इससे न केवल सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि स्थानीय वाहन मालिकों और जनप्रतिनिधियों को भी गुमराह किया जा रहा है।
यह मामला कानाफूसी का विषय बना
कटकमसांडी रेलवे साइडिंग पर गोदावरी कंपनी द्वारा गिराए गए हजारों टन मिट्टी और मलवे का ढेर इस गोरखधंधे का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया जा रहा है। ट्रांसपोर्टिंग में लगे वाहन मालिकों और चालकों के बीच यह मामला अंदर ही अंदर चर्चा और कानाफूसी का विषय बना हुआ है।
इनकार करने से मिलती है धमकी
सूत्र यह भी बताते हैं कि इस पूरे अवैध कारोबार में रांची और रामगढ़ से जुड़े एनआईए के आरोपी व्यक्तियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। आरोप है कि ट्रांसपोर्टिंग कंपनी वाहन मालिकों पर दबाव बनाकर कोयले के स्थान पर मिट्टी और मलवा ढुलवाने के लिए मजबूर कर रही है। ऐसा करने से इनकार करने पर वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने और भाड़ा भुगतान रोकने की धमकी दी जाती है।
इस तरह कोयला परिवहन के नाम पर मिट्टी और मलवा भेजकर बड़े पैमाने पर कोयले की हेराफेरी की जा रही है और इससे जुड़े लोग काले साम्राज्य को और मजबूत कर रहे हैं।