13 साल पहले हुई थी रेस्क्यू
रजनी की कहानी 13 साल पहले शुरू हुई थी, जब वह अपने झुंड से बिछड़कर घायल अवस्था में दलमा के जंगलों में मिली थी। वन विभाग ने बड़ी मशक्कत के बाद न केवल उसका इलाज किया, बल्कि उसे दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी में बड़े प्यार से पाला-पोसा। अब रजनी आश्रयणी की पहचान बन चुकी है।
16 पाउंड का केक कटा
इस अवसर पर वन विभाग की ओर से 16 पाउंड का केक काटा गया, जिसे बच्चों के बीच वितरित किया गया। केक कटने के दौरान रजनी भी बेहद प्रसन्न और उत्साहित नजर आ रही थी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ जीव-जंतुओं और पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
विधायक सविता महतो भी हुईं शामिल
जन्मदिन समारोह में ईचागढ़ की विधायक सविता महतो भी दलमा पहुंचीं और रजनी की लंबी उम्र की कामना की। उन्होंने रजनी को वन विभाग के परिवार का हिस्सा बताया और उसकी देखरेख में विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की।
सैलानियों का करती है स्वागत
दलमा के मालूकोचा में रजनी का स्थाई आवास बनाया गया है। यहां पहुंचते ही सैलानियों का सबसे पहले स्वागत रजनी ही करती है। उसकी लोकप्रियता इतनी है कि उसे देखने के लिए हर दिन लोगों की भीड़ जुटती है। रजनी का यह जन्मदिन समारोह दलमा के वन्य जीव संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।