TMC Vs Election Commission: पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया अब देश की सर्वोच्च अदालत में निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौजूद रहीं और उन्होंने अदालत से बोलने की अनुमति लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई. इस मामले में अब अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी.
कोर्ट में ममता की भावुक दलील
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने अदालत से कहा कि क्या वह बोल सकती हैं क्योंकि वह इसी राज्य से ताल्लुक रखती हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के साथ अन्याय हो रहा है और कहीं भी इंसाफ नहीं मिल रहा है. उन्होंने बताया कि छह बार चुनाव आयोग को पूरी जानकारी के साथ पत्र भेजा गया लेकिन कोई समाधान नहीं निकला. ममता ने कहा कि वह किसी पार्टी के लिए नहीं बल्कि राज्य के लोगों के लिए लड़ रही हैं.
चुनाव आयोग को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. ममता बनर्जी और टीएमसी सांसदों की याचिकाओं पर अब सोमवार को सुनवाई होगी. कोर्ट ने साफ किया कि वह ऐसा समाधान निकालने की कोशिश करेगा जिससे किसी निर्दोष मतदाता का नाम सूची से न हटे.
SIR प्रक्रिया पर सवाल
ममता बनर्जी ने कहा कि यह प्रक्रिया वोट जोड़ने के लिए नहीं बल्कि हटाने के लिए की जा रही है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शादी के बाद जब कोई महिला दूसरे स्थान पर जाती है तो उसके दस्तावेजों में अंतर आ सकता है. ऐसे मामलों में भी लोगों को परेशान किया जा रहा है.
कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने ममता से कहा कि उनके राज्य की ओर से वरिष्ठ वकील पहले से मौजूद हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले ही समयसीमा दस दिन बढ़ाई जा चुकी है और बिना कारण बार बार समय नहीं बढ़ाया जा सकता. साथ ही अदालत ने भरोसा दिलाया कि किसी निर्दोष का नाम न कटे इसके लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा.
ममता बनर्जी के पास एलएलबी की डिग्री
ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि सिर्फ पश्चिम बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि असम और नॉर्थ ईस्ट में यह प्रक्रिया क्यों नहीं हो रही. लोगों को फसलों के बीच नोटिस भेजे जा रहे हैं और वे इसके लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने BLO पर दबाव और आत्महत्या तक की बात कही. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास एलएलबी की डिग्री है और वह पहले वकील के तौर पर प्रैक्टिस कर चुकी हैं. 1994 में वह आखिरी बार अदालत में पेश हुई थीं जहां उन्होंने 33 लोगों को जमानत दिलाई थी.
SIR पर पहले के निर्देश
19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी को असुविधा नहीं होनी चाहिए. कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि लॉजिकल विसंगतियों की सूची ग्राम पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में प्रदर्शित की जाए. राज्य में करीब 1.25 करोड़ वोटर्स इस सूची में बताए गए हैं.
SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गई है बल्कि यह सीधे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ गई है. ममता बनर्जी की आक्रामक मौजूदगी ने इसे राजनीतिक और संवैधानिक दोनों स्तरों पर अहम बना दिया है. आने वाली सुनवाई तय करेगी कि यह प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी और इससे कितने लोगों को राहत मिलती है.