NCRB Report: असफलता का पैमाना कौन तय करता है? तो इसका सीधा और साफ उत्तर है समाज के लोग. हम कहां और कब असफल हो रहे हैं ये हमारी तैयारी नहीं तय करती है, बल्कि समाज के रुढ़िवादी लोग तय करते हैं कि हम असफल हो रहें है. कोई भी परीक्षा या जीवन में कोई भी निर्णय हमें असफल नहीं बनाता है, बल्कि ये हमारी तैयारियों के बारे में बताता हैं कि हम इम्तेहान में कितना खरे उतरे है.
दबाव उस वक्त महसूस नहीं होता जब परिणाम विपरीत आता है. दबाव तब महसूस होता है जब आपके आस-पास के लोग आपके परिणाम की नकारात्मक चर्चा करते हैं और गलत टीका-टिप्पणी करते है, इसी दबाब की वजह से युवाओं के मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव पड़ते है और वह ऐसा कदम उठाते हैं जिससे जिंदगी खत्म हो जाती है. राष्ट्रिय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने विद्यार्थियों की आत्महत्या को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े शेयर किए हैं.
आकंड़ों पर नजर डालें तो स्टूडेंट सुसाइड मामलों में पिछले 6 सालों में बढ़ोत्तरी देखी गई है. जानकारी के अनुसार 2019 की तुलना में 2023 में देश में विद्यार्थियों की आत्महत्या की संख्या 34 फीसदी तक बढ़ गई है. वहीं पिछले 10 सालों में विद्यार्थियों की आत्महत्याओं की संख्या में 65 फीसदी की वृद्धि हुई है.
साल 2013 में 8423 से बढ़कर 2023 में 13892 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की. बता दें कि आत्महत्या से होने वाली कुल मौतों की संख्या में यह वृद्धि पिछले एक दशक में हुई वृद्धि से भी अधिक है. साल 2013 की तुलना में साल 2023 में कुल 27 फीसदी की वृद्धि आत्महत्या के मामले में देखी गई.
साल 2013 में 1.35 लाख और साल 2023 में 1.71 लाख विद्यार्थियों ने सुसाइड किया. आत्महत्या से होने वाली 2019 में 1.39 लाख मौतों की तुलना में यह आंकड़ा 2023 में 23 फीसदी बढ़ा है.
देश में आत्महत्या से होने वाली 2023 में कुल मौतों में विद्यार्थियों की आत्महत्या लगभग 8.1 फीसदी थी. वहीं 10 साल पहले यह आंकड़ा 6.2 फीसदी था. रिपोर्ट के अनुसार पेशे के आधार पर, दैनिक वेतन भोगियों की 27.5 फीसदी, गृहणियों की 14 फीसदी और स्व-रोजगार की 11.8 फीसदी हिस्सेदारी आत्महत्या से होने वाली कुल मौतों में थी.