International News: अमेरिका ने टैरिफ लगाकर दुनिया के देशों पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन यह दांव अब उल्टा पड़ता दिख रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर भारी टैरिफ लगाया, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी उत्पादों का आयात रोक दिया. इसका सीधा असर अमेरिका के किसानों और उद्योगों पर पड़ा है.
सोयाबीन सेक्टर पर सबसे बड़ा झटका
चीन अमेरिकी सोयाबीन का सबसे बड़ा खरीदार रहा है. लेकिन ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी के बाद चीन ने सोयाबीन पर पहले 34% का जवाबी शुल्क लगाया और फिर खरीद पूरी तरह बंद कर दी. नतीजा यह हुआ कि अमेरिकी किसानों के सामने फसल बेचने का संकट खड़ा हो गया.
पिछले साल खरीदा था 12.5 अरब डॉलर का सोयाबीन
अमेरिका ने बीते साल लगभग 24.5 अरब डॉलर का सोयाबीन एक्सपोर्ट किया था, जिसमें से करीब आधा यानी 12.5 अरब डॉलर का सोयाबीन अकेले चीन ने खरीदा, लेकिन इस साल चीन ने एक भी दाना नहीं खरीदा. इससे अमेरिकी किसानों को अरबों डॉलर का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है. अमेरिकी सोयाबीन एक्सपोर्ट काउंसिल के सीईओ के मुताबिक, किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कटाई का समय गुजर रहा है और फसल खपाने का रास्ता नजर नहीं आ रहा. अमेरिका और चीन के बीच कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है.
ट्रंप का राहत पैकेज भी सवालों के घेरे में
ट्रंप ने संकेत दिया था कि अगर चीन से समझौता नहीं हुआ तो किसानों के लिए राहत पैकेज लाया जाएगा. हालांकि किसानों का मानना है कि यह पैकेज केवल अस्थायी सहारा है, स्थायी समाधान नहीं. दूसरी तरफ चीन साफ कर चुका है कि जब तक अमेरिका अनुचित टैरिफ वापस नहीं लेता, तब तक वह दोबारा खरीदारी पर विचार नहीं करेगा.
अन्य सेक्टर भी प्रभावित
चीन ने सिर्फ सोयाबीन ही नहीं, बल्कि ज्वार, मक्का, कपास और मरीन फूड पर भी जवाबी टैरिफ लगाए हैं. इससे इन क्षेत्रों से जुड़े उद्योगों और किसानों की हालत भी खराब है. कुल मिलाकर, ट्रंप की टैरिफ रणनीति का खामियाजा अब अमेरिकी किसान और उद्योग भुगत रहे हैं.