गोविंदपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए डिंपल चौबे ने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के गठन को बड़ी मशक्कत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह मोर्चा राज्य में एकमात्र क्रांतिकारी मोर्चा है, जिसमें सभी समुदायों के क्रांतिकारी लोगों का समागम (एकजुटता) है।
अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा
डिंपल चौबे ने इस बात पर जोर दिया कि उनका मोर्चा निश्चित रूप से सभी समुदायों के अधिकार के लिए संघर्ष और लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने कहा, "हम सभी समुदायों को उनका अधिकार अवश्य दिलाएंगे।" उन्होंने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि झारखंड राज्य को बने पच्चीस वर्ष हो गए हैं, लेकिन खतियानी झारखंडी आज भी अपने आपसी फूट के कारण अपने अधिकारों से वंचित हैं।
बाहरी शक्तियों पर फूट डालने का आरोप
डिंपल चौबे ने खतियानी झारखंडियों को उनके अधिकारों से वंचित रखने के लिए बाहरी शक्तियों को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने आरोप लगाया कि
हम जब-जब एक हुए हैं, तब-तब बाहरी शक्तियों द्वारा जाति के नाम पर और मजहब के नाम पर हमें लड़ने और लड़ाने की कोशिश की गई है। इसी कारण से हम आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं।
उनका यह बयान झारखंड की मौजूदा राजनीति में स्थानीयता और पहचान की बहस को और गरमा सकता है। एकजुटता ही समाधान डिंपल चौबे ने सभी समुदायों से एकजुट होने और एक-दूसरे के आंदोलन का समर्थन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी समुदाय अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करता है, तो सभी समुदायों का फर्ज बनता है कि वे उनका समर्थन करें और उसे आगे बढ़ाएं।
उन्होंने कहा कि ऐसा करने से ही भविष्य में सभी समुदाय अपने-अपने अधिकारों को लेकर आगे बढ़ पाएंगे। उन्हें अन्य समुदायों से समर्थन प्राप्त होगा। इससे सशक्त झारखंड के साथ ही सशक्त समाज की परिकल्पना भी साकार की जा सकती है।
डिंपल चौबे ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा
डिंपल चौबे ने अपनी बात समाप्त करते हुए खतियानी झारखंडी समाज को यह स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य के विकास और अपने अधिकारों की प्राप्ति का एकमात्र रास्ता एकजुटता और आपसी सहयोग ही है, न कि भाषा, जाति या मजहब के नाम पर विभाजन।