Chaibasa: चाईबासा में कुड़मी समुदाय को एसटी (अनुसूचित जनजाति) की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर आदिवासी संगठनों में आक्रोश है। 20 सितंबर को कुड़मी समाज द्वारा प्रस्तावित रेल टेका आंदोलन के विरोध में आदिवासी संगठन एकजुट हो गए हैं। कोल्हान आदिवासी एकता मंच के तहत विभिन्न आदिवासी संगठनों ने बैठक कर इस मांग का विरोध किया है, जिसमें आदिवासी हो समाज, मानकी मुंडा संघ, उरांव समाज और मुंडा समाज शामिल हैं।
आदिवासी संगठनों के सवाल
आदिवासी संगठनों ने स्थानीय सांसदों और विधायकों की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं और कोल्हान में आर्थिक नाकाबंदी की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि कुड़मी समुदाय को एसटी का दर्जा देने से आदिवासियों के अधिकारों और अस्तित्व पर प्रभाव पड़ेगा। कुड़मी समुदाय का तर्क है कि वे ऐतिहासिक रूप से आदिवासी रहे हैं और 1931 तक उन्हें आदिम जनजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। उनका दावा है कि राजनीतिक कारणों से उन्हें एसटी सूची से हटा दिया गया था। दूसरी ओर, आदिवासी संगठन इसे अपने अधिकारों पर हमला मानते हैं और इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
यह मुद्दा तनाव का कारण
यह मुद्दा झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में तनाव का कारण बन रहा है, जहां कुड़मी समुदाय बड़े पैमाने पर आंदोलन की तैयारी कर रहा है। आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि वे अपने हितों की रक्षा के लिए एकजुट हैं।
आम जनता से अपील
जनजातीय अधिकारों और सामाजिक संतुलन से जुड़े ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर हिंसा या टकराव से नहीं बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से ही सही रास्ता निकाला जा सकता है। समाज के हर वर्ग को कानून और संवैधानिक नियमों का सम्मान करना चाहिए। जागरूक नागरिक बनकर हम सब मिलकर क्षेत्र में शांति और एकत को कायम रख सकते हैं।