प्राप्त जानकारी के अनुसार इस योजना का प्रखंड क्षेत्र में 40 लाभुक को इस योजना का लाभ मिला है। इनमें ज्यादातर लोग दिल्ली और पंजाब कमाने गए हैं और कुछ की तो मौत भी हो चुकी है। इन लाभुकों को इसका कुछ अता-पता भी नहीं है। तीन सीएसपी संचालक द्वारा इस सारी गतिविधियों को अंजाम दिया गया है जो पुलिस की रडार पर हैं। इस सिंडिकेट में ज्यादातर लाभुक ठाकुरगंज प्रखंड के पौआखाली थाना क्षेत्र के बरचौंदी और खारुदह पंचायत के हैं।
इस संबंध में ठाकुरगंज थाना अध्यक्ष मकसूद अहमद अशरफी ने बताया कि झारखंड पुलिस ठाकुरगंज आई थी और इस फर्जीवाड़े की जांच भी कर रही है। उन्होंने बताया कि लगभग 40 लोगों के नाम पर ढाई हजार रुपया प्रतिमाह के रूप में तीन किस्त पैसे का उठाव किया गया है। इस पूरे मामले में तीन सीएसपी संचालक भी पुलिस की रडार पर हैं। उन्होंने बताया कि ठाकुरगंज और पौआखाली के अलावे बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के 132 लाभुक ने मंईयां सम्मान योजना की तीन किस्त की राशि अवैध तरीके से उठाई है। जिसकी जांच में अलग टीम जुटी हुई है।
बताते चले कि बरचौंदी पंचायत के कुम्हार बस्ती निवासी मशरफ अली के घर जब सत्यापन हेतु जांच टीम पहुंची तो पता चला कि उनकी मृत्यु छह वर्ष पूर्व हो चुकी है। लेकिन बैंक डिटेल से पता चला है कि उनका खाता अब भी संचालित हो रहा है। पुरूष होने के बाद भी उनके खाते में मंईयां सम्मान योजना की दो से तीन किस्त की राशि पहुंची है। वहीं रियाजुल निशा के घर भी झारखंड पुलिस की जांच टीम जब पहुंची तो वहां भी उनके होश उड़ गये। 75 वर्षीय लाचार वृद्ध महिला को पता ही नहीं है कि उनके खाते में किस योजना की राशि कब और कैसे पहुंची है।
झारखंड पुलिस टीम का जांच का दायरा धीरे-धीरे और बढ़ने लगा है। अब देखना यह होगा कि झारखंड पुलिस दोबारा कब आकर इस सिंडिकेट में संलिप्त लोगों पर कार्रवाई करती है। खुलासे के बाद ठाकुरगंज इलाके में हड़कंप मचा है।