Ranchi News: हरमू स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गुजरात की कुछ गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों के बैंक खातों में जमा बड़ी रकम को लेकर सवाल खड़े किये। उन्होंने दावा किया कि चुनाव नहीं लड़ने वाली कुछ पार्टियों के खातों में करोड़ों से लेकर हजारों करोड़ रुपये तक का चंदा आया है। इस मामले में उन्होंने चुनाव आयोग के साथ ED, CBI और आयकर विभाग की कार्रवाई पर भी सवाल उठाया।
पांडेय ने कहा कि देश में 2800 से अधिक राजनीतिक दल पंजीकृत हैं, जिनमें 6 राष्ट्रीय और 67 क्षेत्रीय दल हैं। उनके अनुसार गुजरात में कुछ गैर-मान्यता प्राप्त दल शेल कंपनियों की तर्ज पर काम कर रहे हैं। ये दल चुनाव आयोग में पंजीकृत हैं, लेकिन इन्हें मान्यता प्राप्त नहीं है।
कई पार्टियों के अस्तित्व और गतिविधियों पर उठे सवाल
मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए पांडेय ने गुजरात में ऐसी करीब 10 पार्टियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इनमें से 6 के कार्यालय अहमदाबाद में हैं। उनके मुताबिक कई दलों में सक्रिय अध्यक्ष या कोषाध्यक्ष तक नहीं हैं। कुछ कार्यालय बंद दुकानों या फ्लैट के कमरों में संचालित होने की बात भी उन्होंने कही। पांडेय ने दावा किया कि इनमें से कई पार्टियों ने कोई चुनाव नहीं लड़ा है।
उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान इन दलों के बैंक खातों में बड़ी रकम जमा हुई। उनके अनुसार किसी पार्टी के खाते में करीब 1000 करोड़, किसी में 620 करोड़ और किसी में 950 करोड़ रुपये होने का दावा है। सबसे कम रकम वाली पार्टी के खाते में भी करीब 138 करोड़ रुपये होने की बात उन्होंने कही।
लोकशाही सत्ता पार्टी का उदाहरण देते हुए पांडेय ने दावा किया कि वर्ष 2023-24 में इस पार्टी को 1045 करोड़ रुपये का चंदा मिला। उनके अनुसार पार्टी ने करीब 950 करोड़ रुपये का खर्च चुनाव आयोग और आयकर विभाग के समक्ष दिखाया। पांडेय ने कहा कि भाजपा को छोड़कर देश की किसी अन्य राष्ट्रीय पार्टी के पास इतनी बड़ी रकम नहीं है।
भाजपा से कथित संबंधों का भी किया जिक्र
विनोद पांडेय ने एक ऐसी राजनीतिक पार्टी का भी उल्लेख किया, जिसका कार्यालय पहले बिहार में होने की बात कही। उनके अनुसार उस पार्टी की तत्कालीन अध्यक्ष के भाजपा में शामिल होने और पार्टी की उपाध्यक्ष बनने के बाद संबंधित पार्टी का कार्यालय गुजरात स्थानांतरित हो गया।
उन्होंने बंगाल की एनसीपीआई नाम की पार्टी का भी जिक्र किया। पांडेय ने दावा किया कि TMC के 20 सांसद इस पार्टी में शामिल हुए थे और वर्तमान में यह पार्टी NDA में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मनी लॉन्ड्रिंग और खरीद-फरोख्त को लेकर सवाल
पांडेय ने सवाल किया कि इतनी बड़ी रकम के लेनदेन के बावजूद जांच एजेंसियों की ओर से कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं यह पैसा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा तो नहीं है और क्या इसका इस्तेमाल विधायकों व सांसदों की खरीद-फरोख्त में किया जा रहा है।
उन्होंने राजनीतिक दलों को चंदा देने वाले लोगों की पहचान सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही कहा कि कार्रवाई नहीं होने पर वह अदालत का रुख करेंगे।
SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी विनोद पांडेय ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस विषय को चुनाव आयोग के सामने रखा गया है। साथ ही DC और BLO से प्रक्रिया को सरल रखने की अपील की, ताकि आम मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
उन्होंने कहा कि पात्र मतदाताओं के नाम जाति या धर्म के आधार पर मतदाता सूची से नहीं हटाये जाने चाहिए, जबकि अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल नहीं होने चाहिए।
फर्जी मुसलमानों और बांग्लादेशियों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के आरोपों को लेकर पांडेय ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय कुछ राजनीतिक दलों को बांग्लादेश और पाकिस्तान का मुद्दा याद आने लगता है। उनके मुताबिक बंगाल और बिहार में भी चुनाव के दौरान ऐसे मुद्दे उठाये जाते हैं। पांडेय ने तंज करते हुए कहा कि ऐसे लोगों को चीन की चिंता नहीं होती, लेकिन बांग्लादेश और पाकिस्तान का मुद्दा उनकी राजनीति के लिए सुविधाजनक होता है।