Ranchi News: झारखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए मिले करोड़ों रुपये के फंड का अपेक्षित उपयोग नहीं हो पा रहा है। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) के तहत राज्य को मिले 125 करोड़ रुपये में से अब तक केवल 34.93 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके हैं। करीब 90.10 करोड़ रुपये अभी भी बैंक और कोषागार में पड़े हुए हैं।
24 में से 20 जिलों में खर्च शून्य, रांची खर्च में सबसे आगे
योजना के तहत राज्य के 24 जिलों को आवंटित राशि में से 20 जिलों में अब तक किसी तरह का भुगतान नहीं किया गया है। इन जिलों को कुल 61.65 करोड़ रुपये मिले थे। राशि उपलब्ध होने के बावजूद खर्च नहीं होने से स्वास्थ्य केंद्रों में प्रस्तावित सुविधाओं को विकसित करने का काम प्रभावित हो रहा है।
जिलों में रांची ने अब तक सबसे अधिक राशि खर्च की है। रांची को 7.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जिसमें 3.06 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। यह कुल आवंटन का करीब 41 प्रतिशत है। वहीं लोहरदगा में 20 प्रतिशत, गुमला में 15 प्रतिशत और पूर्वी सिंहभूम में करीब 3 प्रतिशत राशि खर्च हुई है। राज्य मुख्यालय के स्तर पर 48.03 करोड़ रुपये के आवंटन में से 31.25 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य केंद्रों में इन सुविधाओं पर होना है खर्च
PM-ABHIM के तहत मिलने वाली राशि से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाना है। इसके अलावा शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के लिए दवाइयां और मेडिकल उपकरण खरीदे जाने हैं।
योजना के तहत मरीजों को मुफ्त ब्लड टेस्ट, एक्स-रे सहित अन्य जरूरी जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है।
भुगतान अटकने से वेंडरों पर भी असर
फंड का उपयोग नहीं होने का असर संबंधित वेंडरों और अस्पतालों पर भी पड़ रहा है। कई जगहों पर भुगतान से जुड़े बिल लंबित बताए जा रहे हैं। वहीं, जिलों से उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर नहीं मिलने की स्थिति में केंद्र से योजना की अगली किस्त प्राप्त करने में भी दिक्कत आ सकती है।
15 दिनों में लंबित भुगतान पूरा करने का निर्देश
मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिलों के उपायुक्तों से हस्तक्षेप करने को कहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी सिविल सर्जनों को 15 दिनों के भीतर लंबित भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
विभाग की ओर से कहा गया है कि यदि तकनीकी समस्या के कारण संबंधित एजेंसी भुगतान नहीं कर पा रही है, तो सिविल सर्जन बतौर अकाउंट ऑफिसर नियमों के तहत भुगतान सुनिश्चित करें। साथ ही इस मामले में सिविल सर्जनों की जवाबदेही भी तय की गई है।