Nepal Flood Crisis: नेपाल में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है. राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 734 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं. इनमें बड़ी संख्या ऐसे शवों की है, जिनकी अब तक पहचान नहीं हो सकी है. पहचान नहीं होने के कारण कई शवों का अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहा है. लंबे समय तक रखे रहने से शवों के सड़ने की समस्या भी बढ़ रही है. इससे प्रभावित इलाकों में संक्रमण और बीमारियां फैलने का खतरा प्रशासन के लिए नई चुनौती बन गया है.
अज्ञात शवों के लिए सरकार बनाएगी व्यवस्था
नेपाल सरकार अब उन शवों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है. अधिकारियों के मुताबिक, अंतिम संस्कार से पहले प्रत्येक अज्ञात शव का DNA सैंपल सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि बाद में पहचान होने पर परिवारों को जानकारी दी जा सके. प्रभावित जिलों में सुरक्षाबलों और राहत टीमों का तलाशी अभियान लगातार जारी है. टीमें बाढ़ और मलबे के बीच लापता लोगों की तलाश कर रही हैं.
चितवन में सबसे ज्यादा शव मिले
नेपाल आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDRRMA के आंकड़ों के मुताबिक चितवन जिले में अब तक 259 शव बरामद किए गए हैं. इनमें 74 पुरुष, 41 महिलाएं और 8 बच्चे शामिल हैं. बच्चों में 6 लड़के और 2 लड़कियां हैं. इसके अलावा नवलपरासी पूर्व में 184, नवलपरासी पश्चिम में 82 और गोरखा में 58 शव मिले हैं. नुवाकोट से 52, धादिंग से 50, तनहू से 36 और रसुवा से 13 शव बरामद किए गए हैं.
अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ और बारिश के बाद अभी भी 2,498 लोग लापता हैं. इनमें 85 सुरक्षाकर्मी और 320 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.
मुर्दाघरों में जगह कम पड़ी, दफ्तरों में रखे गए शव
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव मिलने से नेपाल के कई इलाकों में उनके सुरक्षित रखरखाव की समस्या खड़ी हो गई है. मुर्दाघरों में क्षमता कम पड़ने के कारण कुछ शवों को सरकारी कार्यालयों में भी रखा जा रहा है. काठमांडू में लापता लोगों के परिजन त्रिभुवन यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन के मुर्दाघर पहुंच रहे हैं. परिवार अपने लापता सदस्यों की जानकारी हासिल करने और शवों की पहचान की उम्मीद में लगातार वहां पहुंच रहे हैं.
चितवन के मुख्य जिला अधिकारी गणेश अर्याल के मुताबिक, लगातार शव मिलने के बीच उनका सुरक्षित प्रबंधन प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गया है. स्थानीय अस्पताल में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण शवों को सरकारी कार्यालय में रखने की व्यवस्था करनी पड़ी है.
सड़ते शवों से संक्रमण का खतरा बढ़ा
बाढ़ के पानी और मलबे से बरामद किए गए कई शव काफी खराब स्थिति में हैं. पहचान के लिए रखे गए शवों से दुर्गंध आने लगी है. ऐसे हालात में प्रभावित इलाकों में संक्रमण और संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है.
स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती शवों को सुरक्षित तरीके से रखना और प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी फैलने से रोकना है.
गृह मंत्रालय ने तैयार की शव प्रबंधन की रणनीति
बाढ़ के बाद पैदा हुई स्थिति को देखते हुए नेपाल का गृह मंत्रालय संबंधित जिलों के प्रशासन के साथ मिलकर शवों के जल्द और सुरक्षित प्रबंधन की योजना तैयार कर रहा है. गृह मंत्रालय की उप-प्रवक्ता रमा आचार्य सुबेदी के अनुसार, रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, चितवन और नवलपरासी जैसे प्रभावित जिलों में तलाशी अभियान के दौरान लगातार शव बरामद हो रहे हैं.
सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि शवों के अंतिम संस्कार और उनके प्रबंधन की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन को दी जाए या सभी शवों को काठमांडू लाकर केंद्रीय स्तर पर प्रक्रिया पूरी की जाए.
कोल्ड स्टोरेज की क्षमता भी पड़ रही कम
महामारी विज्ञान एवं रोग नियंत्रण विभाग ने भी मौजूदा हालात पर चिंता जताई है. विभाग के निदेशक डॉ. अनुज भट्टाचन के मुताबिक, पहचान होने तक शवों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज की जरूरत होती है, लेकिन एक साथ बड़ी संख्या में शव आने के कारण उपलब्ध रेफ्रिजरेशन क्षमता कम पड़ रही है.
इस समस्या से निपटने के लिए धादिंग में बरामद कुछ शवों को काठमांडू और पोखरा भेजा गया है. इसका उद्देश्य शवों को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखना और स्थानीय स्तर पर संक्रमण के खतरे को कम करना है.
नेपाल में बाढ़ के बाद अब राहत और बचाव अभियान के साथ शवों की पहचान, सुरक्षित रखरखाव और अंतिम संस्कार प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गए हैं. सरकार की प्राथमिकता एक ओर लापता लोगों की तलाश जारी रखना है, वहीं दूसरी ओर संभावित संक्रमण को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाना भी है.