ब्राजील में एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से चीनी सप्लाई पर असर
दुनिया के बड़े चीनी उत्पादकों में ब्राजील सबसे आगे है. इस साल वहां गन्ने की कमी नहीं थी. लेकिन कई मिलों ने चीनी बनाने के बजाय गन्ने से एथेनॉल बनाना ज्यादा फायदेमंद माना. इससे वैश्विक बाजार में ब्राजील से आने वाली चीनी की सप्लाई कम हुई. इसका असर दुनिया के कई बाजारों पर पड़ा और चीनी की कीमतों में तेजी आई. भारत में E20 नीति को लेकर भी सवाल उठे हैं. विपक्ष और कुछ उद्योग विशेषज्ञों का आरोप है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और चीनी का इस्तेमाल बढ़ने से चीनी का उत्पादन प्रभावित हुआ. उनके अनुसार इससे करीब 30 लाख टन चीनी का उत्पादन कम हुआ. हालांकि, सरकार के आंकड़े इससे अलग तस्वीर बताते हैं.
सरकार के अनुसार एथेनॉल के लिए चीनी और गन्ने का हिस्सा पहले करीब 12 फीसदी था. मौजूदा संकट को देखते हुए इसे घटाकर करीब 9 फीसदी कर दिया गया है. सरकार ने एथेनॉल बनाने के लिए अनाज का इस्तेमाल भी बढ़ाया है. अब करीब 68 फीसदी एथेनॉल मक्का और टूटे चावल जैसे अनाज से बनाने की रणनीति अपनाई गई है. इसका मकसद चीनी की उपलब्धता पर दबाव कम करना है.
भारत में चीनी उत्पादन अनुमान से कम रहा
भारत में भी चीनी उत्पादन अनुमान से कम रहा. शुरुआत में करीब 343 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान था. बाद में यह घटकर करीब 306 लाख मीट्रिक टन रह गया. नेट आउटपुट करीब 279 लाख टन बताया गया. महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की कटाई से पहले भारी बारिश हुई. कई जगह खेतों में पानी भर गया. धूप कम मिलने से गन्ने में सुक्रोज की मात्रा प्रभावित हुई. इसका असर मिलों में चीनी की रिकवरी पर पड़ा. उत्तर प्रदेश में भी गन्ने की फसल को रेड रॉट बीमारी और टॉप बोरर जैसे कीटों से नुकसान हुआ. उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में है. इसलिए यहां उत्पादन प्रभावित होने का असर कुल चीनी उत्पादन पर भी पड़ा.
त्योहारों में बढ़ी मांग ने कीमतों पर डाला दबाव
अगस्त से नवंबर के बीच देश में कई बड़े त्योहार आते हैं. रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, दिवाली और छठ के दौरान चीनी की मांग बढ़ जाती है. मिठाई के अलावा चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक और बेकरी उद्योग में भी चीनी की खपत बढ़ती है. इस दौरान मांग सामान्य दिनों की तुलना में करीब 30 से 40 फीसदी तक बढ़ सकती है. जब बाजार में सप्लाई कम होने की जानकारी सामने आई तो जमाखोरी की शिकायतें भी बढ़ीं. थोक कारोबारियों और सट्टेबाजी से जुड़ी गतिविधियों ने कीमतों पर और दबाव डाला.
इसी बीच सरकार ने बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं. करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात को मंजूरी दी गई है. इस आयात पर लगने वाली 100 फीसदी कस्टम ड्यूटी हटाई गई है. सरकार का मकसद विदेश से चीनी लाकर घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाना है.करीब 10 साल बाद सरकार ने इतनी बड़ी मात्रा में कच्ची चीनी के आयात का फैसला लिया है.