Seraikela: सरायकेला थाना क्षेत्र के कुदरसाई गांव में 7.36 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित क्रेशर प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है. रविवार को कंपनी की ओर से ग्रामीणों से बातचीत के लिए गेट-टुगेदर कार्यक्रम रखा गया था. हालांकि, कुदरसाई, नातीडीह और पारलपोशी गांव के ग्रामीणों ने कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का फैसला किया. ग्रामीणों का कहना है कि आबादी और स्कूलों के बीच किसी भी हालत में क्रेशर प्लांट नहीं लगने दिया जाएगा.
500 मीटर के दायरे में स्कूल और आंगनबाड़ी
ग्रामीणों के अनुसार, प्रस्तावित क्रेशर स्थल के 500 मीटर के दायरे में तीन विद्यालय और दो आंगनबाड़ी केंद्र हैं. इनमें केंद्रीय विद्यालय भी शामिल है. प्लांट के आसपास तीन घनी बस्तियां भी मौजूद हैं. इसके अलावा आसपास खेती योग्य जमीन भी है.
धूल से स्वास्थ्य और खेती पर असर की आशंका
ग्रामीणों का कहना है कि क्रेशर प्लांट चलने से बड़ी मात्रा में धूल निकल सकती है. इससे आसपास रहने वाले बच्चों, बुजुर्गों और अन्य लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका है. ग्रामीणों को यह भी डर है कि धूल खेतों तक पहुंचने से फसल और कृषि भूमि प्रभावित हो सकती है.
सहमति लेने के प्रयास का लगाया आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पहले भी उन्हें प्रलोभन देकर प्रस्तावित प्लांट के पक्ष में सहमति लेने का प्रयास किया गया था. ग्रामीणों के मुताबिक, इस मामले को लेकर 14 जुलाई को उपायुक्त, अंचलाधिकारी, खनन विभाग और बीडीओ को ज्ञापन सौंपकर शिकायत की गई थी. उन्होंने बताया कि 1 अगस्त 2025 की बैठक में समोसा, लड्डू और 200 रुपये नकद देने के साथ आवास का आश्वासन देकर सहमति लेने का प्रयास किया गया था.
निर्माण शुरू हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ कहा कि स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, घनी आबादी और खेती की जमीन के बीच क्रेशर प्लांट उन्हें मंजूर नहीं है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जबरन निर्माण या प्लांट का संचालन शुरू करने की कोशिश की गई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.