Bokaro News: बोकारो के गोमिया प्रखंड की बांध पंचायत के पलानी गांव में पिछले कई दिनों से जमीन के नीचे से आग और धुआं निकल रहा है. खेतों के आसपास आग की लपटें दिखाई देने से ग्रामीणों में डर का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि करीब एक महीने पहले जमीन के नीचे से बुलबुले निकलते दिखे थे. इसके बाद धीरे-धीरे आग निकलनी शुरू हुई और अब इसका क्षेत्र बढ़ता जा रहा है.
खेती पर पड़ रहा असर
ग्रामीणों के मुताबिक, जमीन के नीचे आग होने से आसपास की खेती प्रभावित हो रही है. लोग आग वाले इलाके में जाने से भी बच रहे हैं. ग्रामीणों को आशंका है कि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया तो इसका दायरा और बढ़ सकता है. ग्रामीणों का दावा है कि आग भूमिगत कोयले की गैस के कारण लगी हो सकती है. हालांकि, आग की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.

प्रशासन ने दिए डस्ट भराई के निर्देश
ग्रामीणों ने प्रशासन से आग का स्थायी समाधान करने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर प्रभावित जमीन सरकारी है तो उसका अधिग्रहण किया जाए. साथ ही नुकसान झेल रहे लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए.
मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने जिला खनन पदाधिकारी को प्रभावित क्षेत्र में डस्ट भराई कराने का निर्देश दिया था. हालांकि, ग्रामीणों के अनुसार इसके बाद भी जमीन से आग और धुआं निकलना बंद नहीं हुआ है.
ONGC ने बताई अलग स्थिति
मौके का निरीक्षण करने के बाद ONGC अधिकारियों ने कहा कि आग वाली जगह उनके साइट से काफी दूर है. अधिकारियों के अनुसार, पहली नजर में इस घटना का ONGC से सीधा संबंध नहीं दिखता. उन्होंने भूमिगत कोयले की गैस के कारण आग लगने की संभावना जताई है. आसपास खनन क्षेत्र होने के कारण इस पहलू की जांच जरूरी बताई गई है. अधिकारियों ने यह भी कहा कि प्रशासन के निर्देश मिलने पर आग बुझाने के प्रयास में सहयोग किया जा सकता है.
पूर्व विधायक ने उठाए सवाल
गोमिया के पूर्व विधायक लंबोदर महतो ने मामले को लेकर प्रशासन, CCL और ONGC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि कई दिनों से आग निकल रही है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हुआ है. लंबोदर महतो ने जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है.
वैज्ञानिक जांच जरूरी
फिलहाल जमीन के नीचे से आग निकलने की सही वजह स्पष्ट नहीं है. ऐसे में प्रभावित क्षेत्र की तकनीकी और वैज्ञानिक जांच जरूरी है. ग्रामीणों की चिंता है कि अगर जल्द आग पर काबू नहीं पाया गया तो इसका दायरा और बढ़ सकता है. अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकालती हैं.