Current News : सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के विकास और कारोबार को आसान बनाने के उद्देश्य से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद से पारित हो गया है। लोकसभा ने इसे 7 अगस्त 2026 को पारित किया, जबकि राज्यसभा में यह विधेयक 3 अगस्त 2026 को पारित हो चुका था।
MSMED अधिनियम, 2006 के 20 वर्ष पूरे होने के बाद बदलते कारोबारी और तकनीकी माहौल को ध्यान में रखते हुए इसमें संशोधन किए गए हैं। सरकार के अनुसार, उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत MSME की संख्या 1 अप्रैल 2023 के 1.65 करोड़ से बढ़कर अब 9.16 करोड़ हो गई है। MSME क्षेत्र में 40 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है और इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
निवेश और टर्नओवर के आधार पर वर्गीकरण
संशोधन के तहत MSME का वर्गीकरण अब प्लांट एवं मशीनरी में निवेश और टर्नओवर, दोनों मानकों के आधार पर किया जाएगा। उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल को MSME के लिए डिजिटल, निशुल्क और स्वैच्छिक पंजीकरण मंच के रूप में स्थायी आधार दिया गया है।
देरी से भुगतान की समस्या पर सख्ती
छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए विवाद समाधान की प्रक्रिया को तेज किया गया है। संशोधन में ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) की व्यवस्था की गई है।
यदि किसी मामले में डिक्री, अवॉर्ड या आदेश को रद्द करने की याचिका छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहती है, तो अदालत को संबंधित सूक्ष्म एवं लघु उद्यम को अवॉर्ड की कम से कम 50 प्रतिशत राशि का भुगतान करने का आदेश देना होगा।
विवादों के निपटारे की समयसीमा तय
संशोधित कानून में देरी से भुगतान से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए समयसीमा भी तय की गई है। मध्यस्थता की प्रक्रिया पहली सुनवाई की निर्धारित तारीख से 90 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। मध्यस्थता समाप्त होने के बाद मामला 30 दिनों के भीतर पंचाट के लिए भेजना होगा।
दलीलें पूरी होने के बाद संबंधित सुविधा परिषद या वैकल्पिक विवाद समाधान संस्था को 90 दिनों के भीतर अवॉर्ड जारी करना होगा।
बकाया राशि की वसूली आसान
सुविधा परिषद, मध्यस्थता सेवा प्रदाता या वैकल्पिक विवाद समाधान संस्था के माध्यम से हुए समझौते या पंचाट अवॉर्ड की राशि को भूमि राजस्व के बकाये की तरह वसूल किया जा सकेगा। इसके लिए जिला कलेक्टर, उपायुक्त या अधिसूचित प्राधिकारी के माध्यम से कार्रवाई की जा सकेगी।
सरकारी कंपनियों के लिए TReDS के जरिए भुगतान
MSME को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) को MSME से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के बिलों के निपटारे के लिए TReDS प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना होगा।
सरकार के अनुसार, TReDS पर इनवॉयस डिस्काउंटिंग का कारोबार 2022-23 में करीब 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 3.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है। सरकार का मानना है कि CPSEs के लिए TReDS के इस्तेमाल को अनिवार्य करने से MSME के भुगतान संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद मिलेगी।
राज्यों को अधिक MSEFC बनाने का अधिकार
संशोधन के जरिए राज्यों को माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल (MSEFC) की संख्या बढ़ाने और उनके गठन से जुड़े नियम बनाने की अधिक flexibility दी गई है। इससे MSME के भुगतान संबंधी विवादों का तेजी से निपटारा किया जा सकेगा।
छोटे कारोबारियों के लिए नियमों में राहत
संशोधन में कुछ अपराधों को डीक्रिमिनलाइज किया गया है। यानी पहले जिन मामलों में दोषसिद्धि और आपराधिक जुर्माने का प्रावधान था, वहां अब चरणबद्ध नागरिक दंड की व्यवस्था होगी।
गलत जानकारी देने के मामले में पहली बार चेतावनी दी जाएगी और दूसरी तथा उसके बाद की गलती पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसी तरह खरीदारों द्वारा वार्षिक खातों में ब्याज समेत बकाया राशि का खुलासा नहीं करने पर भी पहली बार चेतावनी, दूसरी बार जुर्माना और तीसरी तथा उसके बाद की स्थिति में अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, MSME का औपचारिककरण, समय पर भुगतान और कारोबार के विस्तार को बढ़ावा मिलेगा। संशोधन को विकसित भारत@2047 के लक्ष्य के अनुरूप MSME क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।