पीएम मोदी को खुद सौंपी थी इस्तीफे की पेशकश
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उनके लिए कोई भी प्रशासनिक पद या मंत्री की कुर्सी कभी भी व्यक्तिगत मान-सम्मान का आधार नहीं रही. उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि नीट विवाद के गहराने के बाद उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. उन्होंने पीएम के सामने युवाओं के हित में मंत्रिपरिषद से हटने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद 25 जुलाई को उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया.
राष्ट्रीय हित और युवाओं का कल्याण सबसे ऊपर
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य और राष्ट्रीय हित किसी भी सरकारी पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं. इसके बाद रायराखोल में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और बीजू जनता दल (बीजेडी) की राजनीति पर करारा हमला बोला. बीजेडी समर्थकों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों और "वापस जाओ" के नारों का जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे हथकंडों से जनसेवा के प्रति उनका संकल्प कमजोर नहीं होने वाला.
मैं किसान का बेटा हूँ, जनता के बीच जाता रहूँगा:- धर्मेंद्र प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने बीजेडी नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राजनीतिक रंजिश साधने के लिए राज्य के मासूम युवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह एक साधारण किसान परिवार से आते हैं और जनता के बीच जाकर काम करना ही उनकी प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि भले ही वह ओडिशा के विकास के लिए कोई बहुत असाधारण उपलब्धि न हासिल कर पाए हों, लेकिन उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे राज्य की प्रतिष्ठा पर आंच आए.
बीजेडी विधायक प्रसन्ना आचार्य से बातचीत के बाद पहुंचे कार्यक्रम में
विश्वविद्यालय के समारोह में भाग लेने से पहले के घटनाक्रम पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने बीजेडी के वरिष्ठ विधायक प्रसन्ना आचार्य से संपर्क किया था. कार्यक्रम के दौरान शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने का आश्वासन मिलने के बाद ही वह विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे.