Jharkhand High Court BCA Judgment: झारखंड हाईकोर्ट ने बीसीए डिग्री को विज्ञान धारा से संबंधित डिग्री मानते हुए टीजीटी नियुक्ति से जुड़े एक मामले में राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने बीसीए डिग्री के आधार पर दो अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका में एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की दोनों अपीलें खारिज कर दीं.
यह मामला शारीरिक शिक्षा विषय में टीजीटी नियुक्ति से जुड़ा था. संबंधित भर्ती विज्ञापन में कला, विज्ञान या वाणिज्य में कम से कम 45 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक डिग्री के अलावा शारीरिक शिक्षा की डिग्री को अनिवार्य योग्यता के रूप में रखा गया था.
दो अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था. उनकी उम्मीदवारी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि बीसीए को कला, विज्ञान या वाणिज्य की सामान्य स्नातक डिग्री की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता.
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की 2014 की अधिसूचना का मुद्दा आया. अदालत ने कहा कि इस अधिसूचना में बीसीए को विज्ञान धारा में रखा गया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2014 की अधिसूचना के जरिए कोई नई डिग्री शुरू नहीं की गई थी, बल्कि पहले से मौजूद बीसीए डिग्री की धारा को स्पष्ट किया गया था.
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी भर्ती विज्ञापन में निर्धारित बाकी सभी योग्यताएं पूरी करता है और उसके अंक अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थी से अधिक हैं, तो केवल इस आधार पर उसकी उम्मीदवारी खारिज नहीं की जा सकती कि उसके पास बीसीए की डिग्री है. कोर्ट ने दोनों अभ्यर्थियों की बारहवीं कक्षा की पढ़ाई विज्ञान धारा से होने की बात को भी ध्यान में रखा.
हाईकोर्ट ने एकल पीठ के उस फैसले को सही माना, जिसमें दोनों अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का आदेश दिया गया था. दोनों अभ्यर्थी बाद में सेवा भी ज्वाइन कर चुके हैं. मुकेश रंजन ने एक अक्टूबर 2024 को, जबकि अभिजीत कुमार सिन्हा ने चार अप्रैल 2025 को अपनी सेवा ज्वाइन की थी.
राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से दलील दी गई थी कि दोनों अभ्यर्थियों ने 2014 से पहले बीसीए की डिग्री हासिल की थी. इसलिए 2014 की विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिसूचना को उनकी डिग्री पर लागू नहीं किया जा सकता. हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया.