Chatra Mob Lynching: चतरा जिले में दुष्कर्म के आरोपी की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले में पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. ड्यूटी में लापरवाही पाए जाने पर दो सब-इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. वहीं, इस मामले में अब तक 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. घटना की जांच अभी भी जारी है.
चतरा के पुलिस अधीक्षक अनीमेष नैथानी ने बताया कि टंडवा एसडीपीओ प्रभात रंजन बरवार की जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने और आरोपी को बचाने के लिए अपेक्षित कार्रवाई नहीं की. रिपोर्ट के आधार पर सब-इंस्पेक्टर सुनील सिंह और दुलारी पूर्ति के साथ कांस्टेबल दशरथ महतो और प्रदीप कुमार को निलंबित कर दिया गया है.
दुष्कर्म के आरोप के बाद गांव में भड़का आक्रोश
पुलिस के अनुसार, घटना टंडवा थाना क्षेत्र के एक गांव की है. आरोप है कि सोमवार रात एक युवती के साथ दुष्कर्म हुआ. युवती रात में शौच के लिए घर से बाहर गई थी, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटी. परिजनों ने पूरी रात उसकी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला.
मंगलवार सुबह युवती घर पहुंची और उसने अपने साथ हुई घटना की जानकारी परिवार को दी. इसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने कथित आरोपी को उसके घर से बाहर निकाल लिया. आरोप है कि भीड़ ने लाठी-डंडों और पत्थरों से उसकी जमकर पिटाई की. गंभीर रूप से घायल आरोपी को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
पहले भी दुष्कर्म के मामले में जा चुका था जेल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मृतक वर्ष 2023 के एक दुष्कर्म मामले में जेल जा चुका था और कुछ समय पहले ही जमानत पर बाहर आया था. इस घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है. अन्य आरोपियों की पहचान और भूमिका की भी जांच की जा रही है.
अल्पसंख्यक आयोग की टीम ने किया दौरा
घटना के बाद झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान के नेतृत्व में आयोग की टीम ने गुरुवार को घटनास्थल का दौरा किया. प्रतिनिधिमंडल ने मृतक के परिजनों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और ग्रामीणों से भी बातचीत की.
आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि घटना के समय पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन भीड़ को रोकने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया. ग्रामीणों का दावा है कि पुलिसकर्मी पूरी घटना के दौरान मूकदर्शक बने रहे.
प्रशासन से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
दौरे के बाद आयोग की टीम ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर मामले में अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी ली. प्रतिनिधिमंडल ने एफआईआर, गिरफ्तारियों, पुलिस की भूमिका और मृतक के परिवार को दी गई प्रशासनिक सहायता का पूरा ब्योरा मांगा.
फिलहाल चार पुलिसकर्मियों के निलंबन और 11 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है. प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी.