Lok Sabha Delimitation Bill: लोकसभा सीटों के नए परिसीमन और वर्ष 2029 से महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सियासी माहौल बदलता नजर आ रहा है। शरद पवार की NCP के बाद अब द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने भी अपने रुख में लचीलापन दिखाया है। पार्टी ने फिलहाल बिना किसी शर्त के समर्थन देने की बात नहीं कही है, लेकिन यदि केंद्र सरकार दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा और सीटों के निष्पक्ष बंटवारे को लेकर ठोस आश्वासन देती है, तो इस मुद्दे पर सकारात्मक चर्चा के लिए तैयार होने के संकेत दिए हैं।
दक्षिणी राज्यों के हितों पर जोर
22 सांसदों वाली DMK का कहना है कि तमिलनाडु समेत किसी भी दक्षिणी राज्य के साथ परिसीमन में भेदभाव नहीं होना चाहिए। पार्टी नेताओं का मानना है कि केंद्र सरकार को पहले ही प्रत्येक राज्य की सीटों का हिस्सा स्पष्ट करना चाहिए, ताकि राजनीतिक प्रतिनिधित्व घटने की आशंकाएं खत्म हो सकें। फिलहाल सरकार और DMK के बीच औपचारिक बातचीत नहीं हुई है, लेकिन भरोसा मिलने पर पार्टी अपना रुख बदल सकती है।
सरकार की बढ़ी उम्मीदें, सहयोगियों पर नजर
इससे पहले शरद पवार की NCP भी संकेत दे चुकी है कि यदि सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की समान बढ़ोतरी सुनिश्चित की जाती है तो वह विधेयक का विरोध नहीं करेगी। अब केंद्र सरकार DMK और NCP के अलावा तृणमूल कांग्रेस (TMC) तथा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कुछ सांसदों का समर्थन हासिल करने की कोशिश में है। सूत्रों के मुताबिक, विधेयक में संशोधन कर गृह मंत्री अमित शाह के 50 प्रतिशत सीट वृद्धि वाले आश्वासन को भी शामिल किया जा सकता है।
2029 में महिला आरक्षण का रास्ता हो सकता है साफ
गौरतलब है कि 16 अप्रैल को DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने परिसीमन विधेयक की प्रति जलाकर विरोध दर्ज कराया था, लेकिन अब पार्टी का रुख पहले की तुलना में काफी नरम नजर आ रहा है। पार्टी ने यह भी संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे पर कांग्रेस के फैसले का इंतजार नहीं करेगी। यदि सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल रहती है, तो संविधान संशोधन विधेयक पारित होने के साथ 2029 से लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का रास्ता भी आसान हो सकता है।