Jamshedpur: जमशेदपुर के साकची थाना क्षेत्र में टाटा स्टील गेट के पास शनिवार को मिले अज्ञात शव की पहचान रविवार को हरहरगुट्टू निवासी 55 वर्षीय संताराम हलुआ के रूप में हुई। संताराम एमजीएम अस्पताल में इलाजरत थे और देर रात वार्ड से निकलने के बाद वापस नहीं लौटे थे। बाद में उनका शव बरामद किया गया। पुलिस ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है।
इलाज के दौरान वार्ड से निकले थे संताराम
जानकारी के अनुसार, संताराम हलुआ को कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण 6 जुलाई को एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह अस्पताल के चौथे तल्ले पर बेड नंबर 414 पर इलाज करा रहे थे। बताया गया कि 10 जुलाई की रात करीब साढ़े 12 बजे वह शौचालय जाने की बात कहकर वार्ड से बाहर निकले थे। काफी देर तक वापस नहीं आने पर उनकी पत्नी ने खोजबीन शुरू की। इसके बाद परिवार को इसकी जानकारी दी गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन को इसकी सूचना दी। CCTV फुटेज खंगालने पर पता चला कि संताराम अस्पताल के पिछले हिस्से वाले गेट से बाहर निकल गए थे। इसके कुछ घंटे बाद उनका शव साकची स्थित टाटा स्टील गेट के समीप मिला।
सुरक्षा व्यवस्था पर परिवार ने उठाए सवाल
घटना के बाद संताराम के बेटे पूरण लाल ने एमजीएम अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए होमगार्ड अधिकारियों से शिकायत की। उनका आरोप है कि अस्पताल में मरीजों की निगरानी को लेकर पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। होमगार्ड प्रभारी दिग्विजय पांडेय ने बताया कि अस्पताल परिसर में कई प्रवेश और निकास द्वार हैं, लेकिन सभी गेटों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि संताराम बेसमेंट की ओर स्थित गेट से बाहर निकल गए होंगे।
पहले भी सामने आ चुके हैं मरीजों के गायब होने के मामले
एमजीएम अस्पताल से मरीजों के लापता होने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले बागबेड़ा निवासी मरीज सुनील कुमार यादव भी अस्पताल से गायब हो गए थे, जिनका शव बाद में अस्पताल परिसर से बरामद हुआ था। उस घटना के बाद जांच समिति ने मरीजों की पहचान के लिए ड्रेस कोड लागू करने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने जैसी सिफारिशें की थीं। हालांकि, अब तक इन व्यवस्थाओं को पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है।
एक और मरीज बेसमेंट से मिला सुरक्षित
संताराम के गायब होने वाली रात ही परसुडीह निवासी 38 वर्षीय सुनील साहू भी वार्ड से निकल गए थे। बाद में सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अस्पताल के बेसमेंट से खोजकर सुरक्षित वार्ड में पहुंचाया। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद एमजीएम अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर परिजन चिंता जता रहे हैं।